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डॉक्टरों की चेतावनी: बच्चों के पहले साल में उनके खाने में कभी भी नमक या चीनी न डालें

बच्चों को उनके जीवन के पहले साल में किसी भी तरह का अतिरिक्त नमक और चीनी देने से बचना चाहिए—उनकी अविकसित किडनी अतिरिक्त नमक को संभाल नहीं पाती है, और अतिरिक्त चीनी ज़रूरी पोषक तत्वों की जगह ले लेती है, जिससे आगे चलकर उन्हें खाने की चीज़ों की तीव्र इच्छा (cravings) होने की संभावना बढ़ जाती है।

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By Jigyasa Sain | Faridabad, Haryana | स्वास्थ्य - 27 April 2026


अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (AAP), सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC), और अमेरिकियों के लिए आहार संबंधी दिशानिर्देश—ये सभी सलाह देते हैं कि बच्चों के जीवन के पहले साल में उनके खाने में किसी भी तरह का अतिरिक्त नमक और चीनी न मिलाई जाए।

बच्चों की किडनी नमक की मात्रा को उतनी कुशलता से संभाल नहीं पाती है—कोई भी अतिरिक्त नमक उन पर सिर्फ़ दबाव ही डालेगा। ज़्यादा नमक खाने से उनके छोटे अंगों पर बहुत ज़्यादा ज़ोर पड़ सकता है, जिससे भविष्य में हाई ब्लड प्रेशर, किडनी पर दबाव और यहाँ तक कि किडनी में पथरी जैसी समस्याएँ हो सकती हैं। बच्चों को उनकी ज़रूरत के हिसाब से थोड़ी मात्रा में नमक माँ के दूध या फ़ॉर्मूला दूध से ही मिल जाता है।

अतिरिक्त चीनी का कोई पोषण संबंधी उद्देश्य नहीं होता और यह बढ़ते शरीर के लिए ज़रूरी पोषक तत्वों की जगह ले लेती है। इसे बहुत जल्दी शुरू करने से बच्चों में नमकीन और मीठे स्वाद के प्रति विशेष पसंद विकसित हो सकती है, जिससे बचपन और वयस्कता में मोटापा, दाँतों की सड़न, मधुमेह और हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है।

सबसे अच्छा यही है कि बच्चों को फल, सब्ज़ियाँ और अनाज जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थ उनके प्राकृतिक रूप में ही दिए जाएँ। अपने बच्चे के आहार के बारे में अपने डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें। यह मंत्र जीवन भर के लिए स्वस्थ खान-पान की आदतों को सुनिश्चित करता है।

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