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कर्नाटक हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, बच्चा पैदा करने की बात कहना क्रूरता नही

कर्नाटक उच्च न्यायालय का कहना है कि, जब कोई पति अपनी पत्नी को उच्च शिक्षा प्राप्त करने और बच्चे को जन्म देने की बात करता है, तो इसे क्रूरता नहीं माना जा सकता है.

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By Pooja Mishra | खबरें - 18 August 2022

कर्नाटक उच्च न्यायालय का कहना है कि, जब कोई पति अपनी पत्नी को उच्च शिक्षा प्राप्त करने और बच्चे को जन्म देने की बात करता है, तो इसे क्रूरता नहीं माना जा सकता है. न्यायमूर्ति एच.बी. प्रभाकर शास्त्री ने बुधवार को पत्नी द्वारा पति और सास पर लगाए गए उत्पीड़न के आरोपों को भी खारिज कर दिया. पीठ ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा से राहत की मांग करने वाली पति और उसकी मां की याचिका पर विचार किया.

पीठ ने कहा कि दंपति शिक्षित थे और उन्होंने शादी से पहले अपने भविष्य के बारे में एक-दूसरे से बात की थी. इसलिए, एक पति जो अपनी पत्नी को अपनी शिक्षा को आगे बढ़ाने और नौकरी में शामिल होने के लिए कहता है, उसे क्रूरता नहीं माना जा सकता है.

पति ने पत्नी से कहा था कि 3 साल तक बच्चा न हो. लेकिन, पत्नी ने आरोप लगाया था कि उसके पति के परिवार ने बच्चा पैदा करने की बात को लेकर उसे प्रताड़ित किया. अदालत ने कहा कि, परिवार के व्यापक हित में, पति द्वारा अपनी पत्नी से बच्चा पैदा करने के बारे में बात करना क्रूरता या यातना नहीं माना जा सकता है. पत्नी ने यह भी आरोप लगाया था कि उसे तमिल भाषा सीखने और अपने पति के साथ शटल और कार्ड गेम खेलने के लिए मजबूर किया गया था. कोर्ट ने यह भी कहा है कि पार्टनर को ऐसी भाषा सीखने के लिए कहने में कोई हर्ज नहीं है जो परिवार में सभी को पता हो.


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