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नासिक पुलिस ने एक शानदार अंडरकवर ऑपरेशन को अंजाम दिया, जिसमें सात महिला पुलिस अधिकारियों ने सतपुर MIDC स्थित TCS BPO कार्यालय में कर्मचारी होने का नाटक किया। उनका मकसद यौन उत्पीड़न और ज़बरन धार्मिक धर्मांतरण के एक कथित रैकेट पर नकेल कसना था। ये अधिकारी परिसर के भीतर तैनात रहीं, बैठकों में शामिल हुईं, और वर्कस्टेशन पर काम किया। उन्होंने आरोपियों को रंगे हाथों पकड़ा और परिसर में काम करने वाली 18 से 25 वर्ष की आयु की कई युवा हिंदू महिलाओं की शिकायतों का समर्थन किया। कथित पीड़ितों ने बताया कि चार वर्षों के दौरान उन्हें ब्लैकमेल, अश्लील टिप्पणियों और शादी के बहाने शोषण का शिकार बनाया गया। साथ ही, उन पर धर्मांतरण का दबाव डाला गया—जैसे कि उन्हें ज़बरदस्ती बीफ़ (गोमांस) खिलाना और नमाज़ तथा अन्य धार्मिक अनुष्ठान करने के लिए मजबूर करना। इस मामले में नौ FIR दर्ज की गईं, और छह टीम लीडरों तथा एक HR अधिकारी को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने 40 से अधिक CCTV क्लिप एकत्र किए हैं, और MCOCA (मकोका) के प्रावधानों को लागू किया गया है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश पर एक विशेष जाँच दल (SIT) इस मामले की जाँच कर रहा है। TCS ने आरोपी कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है, और यह दावा किया है कि वह किसी भी प्रकार के उत्पीड़न या ज़बरदस्ती के प्रति 'ज़ीरो टॉलरेंस' (बिल्कुल भी बर्दाश्त न करने) की नीति अपनाता है। इस साहसी कार्रवाई ने IT क्षेत्र की इस दिग्गज कंपनी की नासिक यूनिट में सुरक्षा योजनाओं और आंतरिक शिकायत निवारण प्रणालियों में मौजूद कुछ गंभीर खामियों को उजागर किया है।




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