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छठी जनसंख्या जनगणना, जिसे भारत की जनगणना 2027 के नाम से भी जाना जाता है, देश में होने वाली पहली पूरी तरह से राष्ट्रीय डिजिटल जनगणना होगी और इसे 2 चरणों में पूरा किया जाएगा।
पहला चरण: मकानों की सूची और आवास जनगणना (अप्रैल से सितंबर 2026)
यह पहला कदम होगा, और इसमें घर-घर जाकर सर्वेक्षण किया जाएगा ताकि आवास की स्थिति और परिवार से जुड़ी खास बातों (जैसे सुविधाएं और संपत्ति की मात्रा) के बारे में जानकारी जुटाई जा सके। इसमें 33 अधिसूचित बिंदु भी शामिल हैं, जो मकानों के प्रकार और स्थिति, निर्माण सामग्री, मकान के मालिकाना हक, पीने के पानी की उपलब्धता, बिजली, साफ-सफाई, खाना पकाने के ईंधन, इंटरनेट और परिवारों के पास मौजूद संपत्ति से जुड़े हैं। परिवार के मुखिया का लिंग सबसे पहले तीन श्रेणियों में दर्ज किया जाएगा, जो हैं: पुरुष, महिला और ट्रांसजेंडर।
चरण 2: जनसंख्या गणना (फरवरी 2027)
दूसरे चरण में सभी व्यक्तियों की विस्तृत जनसांख्यिकीय, सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक जानकारी दर्ज की जाएगी, जैसे: आयु, लिंग, वैवाहिक स्थिति, शिक्षा, आर्थिक गतिविधि, प्रवासन, प्रजनन क्षमता, धर्म, दिव्यांगता, भाषा और जाति। 1931 के बाद यह पहली बार है जब जातियों की सूची तैयार की जा रही है। इसके लिए संदर्भ तिथि 1 मार्च, 2027 होगी (जनवरी और बर्फ़बारी वाले क्षेत्रों के लिए सितंबर/अक्टूबर 2026 की तिथियों को समायोजित किया जाएगा)। इस जानकारी का उपयोग गाँवों, कस्बों और वार्डों के लिए नीतियाँ बनाने में महत्वपूर्ण इनपुट प्रदान करने हेतु किया जाएगा।




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