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चल रहे विरोध प्रदर्शनों में एक बड़ा मोड़ तब आया जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख अभिजीत डिपके ने एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को जबरन सफदरजंग अस्पताल ले जाए जाने के बाद अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के चलते दिल्ली पुलिस ने वांगचुक को उनके उपवास के 21वें दिन वहां शिफ्ट किया था। जंतर-मंतर पर समर्थकों को संबोधित करते हुए डिपके ने इस कदम की निंदा करते हुए इसे लोकतांत्रिक आवाज़ों को दबाने की कोशिश बताया। उन्होंने NEET-UG में अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के लिए आंदोलन जारी रखने का संकल्प लिया। युवाओं के नेतृत्व वाली CJP पार्टी वांगचुक के साथ इस आंदोलन में सबसे आगे रही है और उसे छात्रों तथा मशहूर हस्तियों का व्यापक समर्थन मिल रहा है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब देश भर में विरोध प्रदर्शन जोर पकड़ रहे हैं और 20 जुलाई को संसद तक एक बड़े मार्च की योजना है। अधिकारियों का कहना है कि वांगचुक की भलाई के लिए यह कार्रवाई जरूरी थी, जबकि प्रदर्शनकारी सरकार पर मनमानी करने का आरोप लगा रहे हैं। उम्मीद है कि डिपके की भूख हड़ताल से शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग को लेकर सरकार पर दबाव और बढ़ेगा।




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