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प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार संजीव सान्याल ने सुझाव दिया है कि 18 साल के युवाओं को काम शुरू कर देना चाहिए और डिग्री के लिए एनरोलमेंट के दौरान ही उन्हें रोज़गार मिलना चाहिए। सान्याल का कहना है कि इससे उन्हें नौकरी की बुनियादी बातें समझने में मदद मिलेगी और वे बाद में जॉब मार्केट के लिए बेहतर ढंग से तैयार हो सकेंगे।
भारतीय युवाओं की समस्याओं पर बात करते हुए सान्याल ने कहा कि भारत में शिक्षा प्रणाली को इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि युवाओं को वर्कफ़ोर्स (कामकाजी दुनिया) में शामिल होने में देरी होती है, और इस प्रक्रिया में, देरी के दौरान वे कुछ स्किल्स खो देते हैं। उन्होंने लचीलेपन, अप्रेंटिसशिप मॉडल और इंडस्ट्री व रोज़गार से जुड़ी सीखने के मौकों की वकालत की, ताकि छात्र कम उम्र से ही काम का अनुभव हासिल कर सकें और स्किल्स के महत्व को समझ सकें।
कुछ शिक्षकों और माता-पिता ने इस सुझाव पर चिंता जताई है, जबकि कुछ लोग इस पर सवाल उठा रहे हैं। समर्थकों का कहना है कि इससे ग्रेजुएशन के बाद फ़ुल-टाइम नौकरी करने वाले छात्रों की संख्या बढ़ सकती है और छात्रों की रोज़गार पाने की क्षमता (employability) में सुधार हो सकता है, लेकिन इससे पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने को लेकर चिंता भी हो सकती है। यह सुझाव सरकार की शिक्षा और कौशल विकास नीतियों और कार्यक्रमों (जैसे NEP 2020) के अनुरूप है, जिनका मकसद शिक्षा में सुधार लाना है। उनका कहना है कि अगर ऐसे विचारों को अपनाया जाए, तो आने वाले दशकों में 'डेमोग्राफिक डिविडेंड' (जनसांख्यिकीय लाभांश) के तौर पर भारत को बहुत बड़ा आर्थिक फ़ायदा हो सकता है।




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