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गांधीनगर: गुजरात विधानसभा ने मंगलवार को, सात घंटे चली लंबी बहस के बाद, गुजरात यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल 2026 को मंज़ूर कर दिया। इसके साथ ही उत्तराखंड के बाद गुजरात दूसरा ऐसा राज्य बन गया है जिसने एक समान नागरिक संहिता (Common Civil Code) को अपनाया है।
यह बिल अनुसूचित जनजातियों को छोड़कर, धर्म की परवाह किए बिना, सभी निवासियों को शादी, तलाक़, विरासत और लिव-इन रिलेशनशिप के मामले में एक समान कानूनी दर्जा देता है।
इसके मुख्य बिंदु ये हैं कि शादी और लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन करवाना ज़रूरी है। ऐसा न करने पर 3 महीने तक की जेल या कम से कम 10,000 रुपये का जुर्माना हो सकता है। लिव-इन रिलेशनशिप को खत्म करने (समाप्त करने) का भी रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। यह कानून बहुविवाह/दो शादियों पर रोक लगाता है और बेटे-बेटियों को विरासत में बराबर का हक देता है।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के अनुसार, यह लैंगिक न्याय और राष्ट्रीय एकता की दिशा में उठाया गया एक कदम है। कांग्रेस ने इस बिल का विरोध किया और इसे 'मुस्लिम विरोधी' तथा 'बुनियादी अधिकारों के खिलाफ' बताया।
UCC बिल गुजरात के उन निवासियों पर भी लागू होगा जो राज्य के बाहर रह रहे हैं। साथ ही, यह ज़बरदस्ती या धोखे से की गई शादियों के खिलाफ सुरक्षा को भी मज़बूत करता है।




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