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भारत: अमेरिका में भारत के राजदूत, विनय मोहन क्वात्रा ने न्यूयॉर्क टाइम्स के एक लेख का कड़ा विरोध किया है। इस लेख में मोदी सरकार की इंटरनेट नीतियों की आलोचना करते हुए उन्हें इंटरनेट पर सेंसरशिप लगाने का एक "खतरनाक" उदाहरण बताया गया था।
X (ट्विटर) पर की गई एक पोस्ट में, क्वात्रा ने कहा कि अरमान खान द्वारा लिखा गया यह लेख एक पक्षपाती और एकतरफा राय पर आधारित है। उन्होंने जवाब देते हुए कहा, "'सेंसरशिप' शब्द का इस्तेमाल करना एक आकर्षक शीर्षक तो हो सकता है, लेकिन भारत के IT नियमों के संदर्भ में यह एक बेहद कमजोर और तर्कहीन दलील है। ये नियम तो असल में वायरल होने वाली गलत जानकारियों (misinformation) पर रोक लगाने और समाज की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाए गए हैं।"
राजदूत ने इस बात पर ज़ोर दिया कि ये नियम पूरी तरह से प्लेटफॉर्म की जवाबदेही तय करने से जुड़े हैं, न कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक लगाने से। हालांकि, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि न्यूयॉर्क टाइम्स ने जानबूझकर इन अलग-अलग मुद्दों को आपस में मिलाकर भ्रम पैदा करने की कोशिश की है।
1 मई, 2026 को प्रकाशित NYT के इस लेख में इस तथ्य पर प्रकाश डाला गया था कि सरकारी दबाव के चलते विभिन्न वेबसाइटों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर व्यंग्य (satire) और अन्य आलोचनात्मक सामग्री को ब्लॉक कर दिया जाता है। क्वात्रा की ज़ोरदार प्रतिक्रिया इस बात को रेखांकित करती है कि भारत सरकार को अभी भी अपने डिजिटल नियमों का बचाव करना होगा, और उन्हें दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में सामाजिक शांति और राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ज़रूरी कदम बताना होगा।




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