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भारत ने 27 अप्रैल, 2026 को न्यूज़ीलैंड के साथ एक "युग-परिवर्तक" मुक्त व्यापार समझौता (FTA) किया, जो भारतीय निर्यातकों, सेवा क्षेत्र और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने का वादा करता है।
भारत के लिए मुख्य लाभ:
- शून्य-शुल्क निर्यात: भारत के 8,284 उत्पादों की 100% श्रेणियों को तुरंत न्यूज़ीलैंड में ड्यूटी-फ्री पहुँच मिल जाती है। इससे कपड़ा, परिधान, चमड़ा, जूते-चप्पल, इंजीनियरिंग, रसायन/फार्मास्यूटिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और खाद्य उत्पादों जैसे श्रम-प्रधान उद्योगों को मदद मिलेगी (पहले इन पर 10% तक का शुल्क लगता था)।
- सेवाएँ और प्रवासन: IT, शिक्षा, वित्त, पर्यटन और निर्माण क्षेत्रों में मज़बूत समझौते किए गए हैं। 5,000 तक भारतीयों के लिए एक नया अस्थायी रोज़गार प्रवेश वीज़ा शुरू किया गया है, जिसके तहत वे 3 साल तक की अवधि के लिए न्यूज़ीलैंड में अस्थायी रूप से काम कर सकेंगे। छात्रों के लिए बेहतर सहायता उपलब्ध होगी, जिसमें काम करने के अधिकार भी शामिल हैं।
- निवेश: न्यूज़ीलैंड ने विनिर्माण और बुनियादी ढाँचे के क्षेत्र में भारत में 15 वर्षों के दौरान $20 बिलियन तक का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) लाने का वादा किया है। इस समझौते का उद्देश्य पाँच वर्षों के भीतर व्यापार को दोगुना करके 5 अरब डॉलर तक पहुँचाना है, साथ ही भारत के डेयरी और अन्य कृषि उत्पादों को सुरक्षित रखना है। यह भारत के निर्यात विविधीकरण और उसकी हिंद-प्रशांत रणनीति के लिए एक अच्छी खबर है।




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