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भारतीय रेलवे ने ट्रेन टिकटों के कैंसलेशन और रिफंड के नियमों में बड़े बदलाव किए हैं, जिन्हें 1 अप्रैल से 15 अप्रैल, 2026 के बीच अलग-अलग चरणों में लागू किया जाएगा। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा घोषित इन संशोधनों से टिकटों की कालाबाज़ारी रोकने और असली यात्रियों के लिए सीटें उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
कन्फर्म टिकटों के लिए नए मानकों के अनुसार:
- ट्रेन छूटने से 72 घंटे से ज़्यादा समय पहले कैंसलेशन: पूरा रिफंड मिलेगा, जिसमें से केवल तय कैंसलेशन शुल्क (ट्रेन की श्रेणी के अनुसार, जैसे AC फर्स्ट क्लास में 240 रुपये, सेकंड क्लास में 60 रुपये) काटा जाएगा।
- 72 से 24 घंटे के बीच कैंसलेशन: किराए का 25% हिस्सा काटा जाएगा (साथ में न्यूनतम तय शुल्क भी)।
- 24 से 8 घंटे के बीच कैंसलेशन: किराए का 50% हिस्सा काटा जाएगा (न्यूनतम)।
- यात्रा से 8 घंटे से कम समय पहले: कोई रिफ़ंड नहीं मिलेगा।
पूरा रिफ़ंड मिलने की अधिकतम समय सीमा बढ़ाकर 72 घंटे कर दी गई है। ये ई-टिकट और आई-टिकट होंगे। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी यात्रा पहले से बुक करें और अगर ज़रूरत पड़े तो समय रहते कैंसिल कर दें, ताकि उन्हें कम से कम नुकसान हो। तत्काल जैसी अन्य विशेष श्रेणियों के लिए नियम अलग हो सकते हैं। IRCTC और रेलवे अधिकारी इस हिसाब से सिस्टम को अपडेट करेंगे।




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