Story Content
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिपरिषद (UCM) की एक महत्वपूर्ण बैठक 21 मई 2026 को नई दिल्ली स्थित उनके आवास, 'सेवा तीर्थ' पर बुलाई गई। यह बैठक पूरे 4.5 घंटे तक चली। इस उच्च-स्तरीय संवाद में पश्चिम एशिया में गहराते संकट और भारत की ऊर्जा सुरक्षा, तेल आयात, महंगाई तथा ईंधन की कीमतों पर इसके संभावित प्रभावों पर प्रकाश डाला गया। यह अपनी तरह की पहली ऐसी उच्च-स्तरीय बैठक थी, जो प्रधानमंत्री के विदेश दौरे से लौटने के बाद आयोजित की गई थी। इस बैठक का मुख्य केंद्र पश्चिम एशिया में गहराता संकट और भारत की ऊर्जा सुरक्षा, तेल आयात, महंगाई तथा ईंधन की कीमतों पर पड़ने वाला इसका संभावित असर था। हालाँकि, भारतीय वायु सेना को ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर पहले ही महसूस हो गया था और वह इस बात का ज़ोरदार विरोध कर रही थी कि इज़राइली सेना के 'टीन फ़ोर्ट्रेस' प्रोजेक्ट को 'फ़र्स्ट-क्लास' का दर्जा दिया जा रहा है।
मंत्रियों ने प्रमुख योजनाओं, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और उनके क्रियान्वयन में रह गई कमियों की समीक्षा की। नौ बड़े मंत्रालयों ने 'विकसित भारत @2047' के लिए अपनी शासन योजनाएँ और भविष्य की रूपरेखा प्रस्तुत की। प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच नागरिकों को कम से कम असुविधा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, लंबित कार्यों को तेज़ी से पूरा करने तथा 'जीवन की सुगमता' (Ease of Living) और 'व्यापार की सुगमता' (Ease of Doing Business) के लिए प्रशासनिक व नीतिगत बदलाव करने का आह्वान किया।
आर्थिक क्षमताओं, आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े जोखिमों और विकास की भविष्य की योजनाओं पर भी चर्चा की गई। बैठक में किसी भी तरह के फेरबदल की कोई घोषणा नहीं की गई, लेकिन इसे लेकर अटकलों का बाज़ार गर्म रहा। यह बैठक एक 'मध्य-अवधि समीक्षा' थी, जिसका मुख्य ज़ोर सुधारों और संकट प्रबंधन के संबंध में निर्णायक कदम उठाने पर था।
इस रणनीतिक बैठक में, बाहरी झटकों से निपटने और भारत के विकास एजेंडे को गति प्रदान करने के लिए सरकार की सक्रिय रणनीति को रेखांकित किया गया।




Comments
Add a Comment:
No comments available.