Story Content
नई दिल्ली: सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक बड़ा और निर्णायक बयान देते हुए कहा है कि भारत में पेट्रोल और डीज़ल कारों का अब कोई भविष्य नहीं बचा है।
Busworld India Conclave 2026 को संबोधित करते हुए, गडकरी ने गाड़ी बनाने वाली कंपनियों को चेतावनी दी कि सिर्फ़ जीवाश्म ईंधनों (fossil fuels) पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। उन्होंने कहा, "अगर आप (OEMs) बदलाव नहीं करेंगे, तो सावधान हो जाइए; पेट्रोल और डीज़ल का भविष्य अब अच्छा नहीं है।"
मंत्री ने कहा कि हमें आयातित कच्चे तेल पर अपनी निर्भरता कम करनी चाहिए और बढ़ते वायु प्रदूषण से मिलकर लड़ना चाहिए। उन्होंने इंडस्ट्री को प्रोत्साहित किया कि वे बायोफ्यूल, इथेनॉल ब्लेंडिंग (E85), CNG, LNG, हाइड्रोजन और इलेक्ट्रिक गाड़ियों जैसे ज़्यादा साफ़-सुथरे विकल्पों को अपनाने की प्रक्रिया में तेज़ी लाएँ।
गडकरी ने विशेष रूप से परिवहन व्यवस्था में ग्रीन ईंधनों के महत्व पर ज़ोर दिया और लोगों से आग्रह किया कि वे सबसे पहले गुणवत्ता (quality) को प्राथमिकता दें और लागत में कटौती (cost-cutting) को दूसरे नंबर पर रखें। उन्होंने कहा कि पेट्रोल और डीज़ल इंजन अब "शुद्ध" (pure) नहीं रहेंगे, क्योंकि धीरे-धीरे ब्लेंड्स (मिश्रण) और वैकल्पिक ईंधन ही नया सामान्य (new norm) बन जाएँगे। इन टिप्पणियों ने भारतीय लोगों की 'ग्रीन मोबिलिटी' (हरित गतिशीलता) से जुड़ी महत्वाकांक्षाओं पर बहस को फिर से शुरू कर दिया है। हालाँकि, इस बदलाव के पर्यावरणीय और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े फायदे हैं, फिर भी बुनियादी ढाँचे, लागत और उपभोक्ताओं द्वारा इसे अपनाने से जुड़ी चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं। सरकार अभी भी दीर्घकालिक स्थिरता के लक्ष्यों को प्राप्त करने के उद्देश्य से, इलेक्ट्रिक और वैकल्पिक ईंधन वाले वाहनों को बढ़ावा देने वाली नीतियाँ लागू कर रही है।




Comments
Add a Comment:
No comments available.