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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्कूलों और शिक्षण संस्थानों से अपील की है कि वे ईंधन बचाने और विदेशी मुद्रा भंडार की सुरक्षा के राष्ट्रीय अभियान के तहत ऑनलाइन क्लास की योजना को आगे बढ़ाएं।
पश्चिम एशिया में तनाव के कारण दुनिया भर में तेल की कीमतें बढ़ने के संदर्भ में, मोदी ने स्कूलों से अपील की है कि वे COVID-19 महामारी के दौर की तरह ही, अस्थायी तौर पर वर्चुअल लर्निंग (ऑनलाइन पढ़ाई) की व्यवस्था सुनिश्चित करें। उम्मीद है कि इससे स्कूल बसों, वैन और निजी वाहनों द्वारा हर दिन होने वाले भारी मात्रा में ईंधन की खपत में कमी आएगी।
यह अपील खर्चों में कटौती और उपभोग को सीमित करने के व्यापक संदेश का ही एक हिस्सा है। इसके तहत कर्मचारियों के लिए 'घर से काम' (WFH) करने, तेल की खपत कम करने, और सोने की खरीद व विदेश यात्राओं को टालने जैसे उपाय शामिल हैं।
नागरिकों और संस्थानों द्वारा उठाए गए इन कदमों को रणनीतिक कदम माना जा रहा है, जिनसे हर साल अरबों की विदेशी मुद्रा की बचत हो सकती है। हालांकि यह प्रस्ताव अनिवार्य नहीं है, लेकिन इसने यह सवाल ज़रूर खड़ा कर दिया है कि मुश्किल के इस दौर में शैक्षिक ज़रूरतों और राष्ट्रीय आर्थिक आवश्यकताओं के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
आने वाले हफ़्तों में, कई अभिभावकों और शिक्षकों के बीच 'हाइब्रिड मॉडल' (ऑनलाइन और ऑफलाइन का मिला-जुला रूप) की व्यावहारिकता को लेकर चर्चा होने की संभावना है।




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