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आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, ताइवान के शेयर बाज़ार का मार्केट कैपिटलाइज़ेशन बढ़कर $4.95 ट्रिलियन हो गया है, और इस तरह उसने आधिकारिक तौर पर भारत को पीछे छोड़कर दुनिया के पाँचवें सबसे बड़े शेयर बाज़ार का दर्जा हासिल कर लिया है (भारत का मार्केट कैपिटलाइज़ेशन $4.92 ट्रिलियन है)। 25 मई, 2026 को हासिल की गई यह उपलब्धि, वैश्विक बाज़ारों पर AI की तेज़ी (AI boom) के ज़बरदस्त प्रभाव को उजागर करती है।
इस तेज़ी का एक बड़ा श्रेय 'ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी' (TSMC) को जाता है, जो दुनिया की सबसे बड़ी चिप निर्माता कंपनी है। अत्याधुनिक AI चिप्स की ज़बरदस्त माँग के चलते इस कंपनी के शेयरों की क़ीमतों में भारी उछाल देखने को मिला है। ताइवान के प्रमुख शेयर सूचकांक (index) में 40% से भी ज़्यादा हिस्सेदारी TSMC की है।
दूसरी ओर, ताइवान की GDP ($977 बिलियन) भारत की GDP ($4.15 ट्रिलियन) की तुलना में काफ़ी छोटी है। लेकिन ताइवान के तकनीकी उद्योग (Tech Industry) की विशिष्ट संरचना—जो कि बेहद केंद्रित है और जिसका 'मार्केट कैप-टू-GDP अनुपात' बहुत अधिक है—ने ही इस उपलब्धि को संभव बनाया है। भारत अभी भी सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, लेकिन विदेशी निवेशकों द्वारा हाल ही में की गई निकासी भारतीय इक्विटी के मूल्यांकन को नीचे खींच रही है।
यह बदलाव इस तथ्य को उजागर करता है कि हाई-टेक नेतृत्व छोटी अर्थव्यवस्थाओं को वैश्विक वित्तीय बाज़ार की रैंकिंग में बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से आगे निकलने में मदद कर सकता है, जिससे वैश्विक बाज़ारों में निवेशकों का नज़रिया बदल रहा है।




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