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टाटा ग्रुप मध्य प्रदेश के रीवा में ₹28,000 करोड़ की लागत से भारत का पहला निजी तौर पर संचालित न्यूक्लियर पावर प्लांट बनाकर इतिहास रचने जा रहा है। टाटा पावर के नेतृत्व वाला यह उद्यम, भारत के न्यूक्लियर पावर क्षेत्र में एक बड़ा मोड़ साबित होगा, जो पारंपरिक रूप से सरकारी नियंत्रण में रहा है।
यह प्रोजेक्ट हाल ही में किए गए उन नीतिगत बदलावों का परिणाम है, जिनके तहत न्यूक्लियर पावर उत्पादन में निजी क्षेत्र की भागीदारी के द्वार खोले गए हैं; इसमें न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) के साथ संयुक्त उद्यम (Joint Ventures) भी शामिल हैं। इसकी शुरुआत संभवतः कम क्षमता के साथ होगी, जिसमें भविष्य में क्षमता बढ़ाने और स्वच्छ व विश्वसनीय बेसलोड बिजली प्रदान करने की पूरी क्षमता होगी। साथ ही, यह भारत को 2047 तक अपनी न्यूक्लियर एनर्जी क्षमता में भारी वृद्धि करने के लक्ष्य को प्राप्त करने में भी मदद करेगा।
टाटा पावर ने अपने प्रोजेक्ट्स के लिए कई स्थानों और तकनीकों पर विचार किया है, जिनमें 'स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स' (SMRs) भी शामिल हैं। रीवा प्रोजेक्ट हज़ारों रोज़गार पैदा करेगा, स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगा और स्वच्छ ऊर्जा के ज़रिए भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मज़बूत करेगा। यह प्रोजेक्ट इस क्षेत्र में निजी निवेश लाने में टाटा की अग्रणी भूमिका को उजागर करता है, साथ ही अन्य संभावित निवेशकों की भूमिका को भी।




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