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इंसानों के असली बेस्ट फ्रेंड कहलाएं ये जीव, जानिए कैसे चूहें से लेकर डॉल्फिन तक ने की जासूसी

यहां जानिए उन जीवों के बारे में विस्तार से जो बने जासूसी की दुनिया के बेताज बादशाह.

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By Deepakshi | खबरें - 04 April 2021

हम सभी ने पंचतंत्र और चंपक जैसे किताबों का बहुत लुत्फ उठाया है. उनमें जानवरों के साथ एक अपनी हम एक अलग दुनिया बना लेते थे. जानवरों की तरह हम भी इस धरती पर एक सामान्य जीव हैं. लेकिन कुछ मामलों में इस धरती पर रहने वाले कई जीव कमाल करते हुए भी दिखाई दिए हैं. कुछ ऐसे जीव सामने आए हैं जिनकी मदद से ही हम आगे बढ़ पाए हैं. लेकिन यहां हम ऐसे कुछ जीवों के बारे में बताने जा रहे हैं जिसमें आपको पता लगेगा कि कैसे जासूसी की दुनिया के वो बेताज बादशाह है, थे और शायद आने वाले वक्त में भी रहेंगे.

1. मैसेज भेजने के लिए कबूतर

प्राचीन काल के वक्त से ही कबूतरों को संदेशवाहक के तौर पर समझा जाता था. दोनों विश्व युद्धों में भी कबूतरों का उपयोग संदेश भेजने के लिए किया गया था.

2. कबूतर का फोटोग्राफर के तौर पर इस्तेमाल

कबूतर का इस्तेमाल फोटोग्राफर के तौर पर भी किया गया है. 1970 में इनके गले में छोटा सा कैमरा बांधने का प्रोजेक्ट था. जासूसी आसानी से की जा सकें. लेकिन इस्तेमाल हुआ है या नहीं कहा नहीं जा सकता ह

3. इंसान के बेस्ट फ्रेंड

जासूसी के मामले में कुत्तों का नाम सबसे ज्यादा लिया जाता है. ऐसा माना जाता है कि कुत्ते बारूदी सुरंग और बम की सुंगध को आसानी से सूंघ लेते हैं. इसी के चलते इनका इस्तेमाल किया जाता है.

4.  बम गिराने के लिए होता था चमगादड़ का इस्तेमाल

क्या आपको पता है कि चमगादड़ का इस्तेमाल बम गिरवाने के लिए किया जाता था. 1940 में अमेरिका ने एक प्रयोग शुरु किया था. वो चमगादड़ों पर बम बांध देता था और उसकी मदद से विस्फोट करवाता था. यह बिल्कुल ड्रोन की तरह काम करता था.

5. मासी नहीं जासूस है बिल्ली

बिल्ली एक जासूस की भूमिका में रहती है. दरअसल 1960 के अंदर सीआईए ने बिल्लियों के जरिए सोवियत दूतावासों में जासूसी करने की योजना शुरु की थी. इसके लिए एक बिल्ली में माइक्रोफोन, बैटरी, एंटीना ऑपरेशन कर लगा दिए जाते थे.

6. अमेरिका सेना में डॉल्फिन 

क्या आपको पता है कि सी लायन और डॉल्फिन अमेरिका सेना में 1960 के वक्त से काम कर रहे हैं. उन्हें दुश्मन गोताखोरों का पता लगाने, जहाज के यात्रियों को सुरक्षित तट तक पहुंचाने और साथ ही पानी के नीचे बिछाई गई बारुदी सुरंगों का पता लगाने के लिए करती है.

7. चूहे भी करते हैं गजब का काम

इन सबके अलावा तंजानिया में गैर सरकारी संगठन 'अपोपो' चूहों को बारुदी सुरंग सूंघने की ट्रेनिंग दे रहा है. चूहों को कड़ी ट्रेनिंग दी जाती है, फिर ये दूसरे देशों को किराए पर दिए जाते हैं. आपको बता दें कि फिलहाल 57 ऐसे चूहें हैं जो ये काम कर सकते हैं.

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