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रविवार की रात, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक और विवाद खड़ा कर दिया। उन्होंने पोप फ्रांसिस पर तीखा हमला बोलते हुए, इस अमेरिकी मूल के पोप को अपराध के मामले में 'कमज़ोर' और विदेश नीति में 'बेहद खराब' बताया। यह हमला ईरान में अमेरिकी सेना की कार्रवाई को लेकर दोनों के बीच चल रहे मतभेदों के बीच किया गया था।
इसके ठीक 40 मिनट बाद, ट्रंप ने 'Truth Social' पर AI से बनी अपनी एक तस्वीर पोस्ट की। इस तस्वीर में ट्रंप ने सफेद और लाल रंग के कपड़े पहने हुए थे—जो जीसस क्राइस्ट के कुछ पारंपरिक चित्रों से मिलते-जुलते थे। तस्वीर में वे एक बीमार व्यक्ति के माथे पर अपना हाथ रखे हुए थे, मानो वे उसे ठीक कर रहे हों। उनके पीछे डॉक्टर और सैनिक जैसे अन्य लोग खड़े थे, जो सभी हैरानी भरी नज़रों से उन्हें ही देख रहे थे।
बिना किसी कैप्शन के पोस्ट की गई इस तस्वीर पर ईसाई रूढ़िवादियों और कैथोलिक समुदाय के लोगों ने तुरंत तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इस तस्वीर को 'ईशनिंदा' और खुद को मसीहा के रूप में पेश करने वाला (messianic) बताया। इसके बाद ट्रंप ने वह पोस्ट हटा दी। जब उनसे इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि यह तस्वीर उन्हें एक डॉक्टर के रूप में दिखा रही थी, न कि जीसस के रूप में। उन्होंने पोप से माफी मांगने का कोई इरादा नहीं जताया, और न ही पोप की आलोचना करने के अपने रुख से पीछे हटे।
इस घटना ने वेटिकन और व्हाइट हाउस के बीच संबंधों में भी तनाव पैदा कर दिया है। यह घटना ट्रंप के धार्मिक, राजनीतिक और व्यक्तिगत दृष्टिकोणों को लेकर दोनों पक्षों के बीच मौजूद गहरे मतभेदों को और भी स्पष्ट रूप से उजागर करती है।




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