विश्व का सबसे खुशहाल देश फिनलैंड है परेशान, कामगारों को देश बुला रहा है

'वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट' में फिनलैंड नंबर 1 स्थान पर है. इसका सबसे बड़ा कारण यहां की लाइफस्टाइल है. यह देश अपने सुख-सुविधाओं के लिए जाना जाता है. कहा जाता है कि इस देश में ऐसा कोई भी नागरिक नहीं है जो खुशहाल नहीं है.

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हेलसिंकी, फिनलैंड: फिनलैंड को दुनिया का सबसे बड़ा खुशहाल देश माना जाता है.  'वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट' में ये देश लगातार चौथी बार सबसे ऊपर रहा है, मगर ये देश एक परेशानी का सामना कर रहा है. यहां काम करने वाले लोग नहीं मिल रहे हैं, इस कारण से यहां के लोगों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. कामगारों की कमी के कारण फिनलैंड चाहता है कि दूसरे देशों के लोग यहां आकर बसे और काम करें.

सबसे बेहतरीन देश है फिनलैंड

'वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट' में फिनलैंड नंबर 1 स्थान पर है. इसका सबसे बड़ा कारण यहां की लाइफस्टाइल है. यह देश अपने सुख-सुविधाओं के लिए जाना जाता है. कहा जाता है कि इस देश में ऐसा कोई भी नागरिक नहीं है जो खुशहाल नहीं है.

क्यों हो रही है परेशानी?

बेशक ये देश हर मामले में अन्य देशों से बेहतरीन है, मगर यहां की सबसे बड़ी समस्या है कि यहां कोई काम करने वाला नहीं. यहां की आबादी बुढ़ी होती जा रही है ऐसे में फिनलैंड प्रवासियों को अपने देश में बसने का न्योता दे रहा है.


क्यों नहीं है कामगार?

न्यूज एजेंसी एएफपी को टैलेंटेड सॉल्यूशंस के रिक्रूटर साकू तिहवेरेन ने जानकारी दी कि पूरी दुनिया जानती है कि हमारी आबादी बुढ़ी होती जा रही है. इसे हर जगह स्वीकार कर लिया गया है. हमें बहुत ही ज़्यादा संख्या में कामगारों की आवश्यकता है.


प्रवासियों के साथ होता है भेदभाव

फिनलैंड में कामगारों के साथ भेदभाव भी देखने को मिलता है. सामाजिक और राजनीतिक दिक्कतों के कारण लोग इस देश में नहीं आना चाहते हैं. अक्सर, दूसरों देशों के प्रवासियों के प्रति भेदभाव की शिकायत आती रहती है.


इस मुद्दे पर ब्रिटिश नागरिक अहमद (बदला हुआ नाम) ने एएफपी को बताया कि मेरे साथ फिनलैंड में भेदभाव हुआ है, यहां तक की मुझसे हाथ तक नहीं मिलाया गया.


फिनलैंड आज मुश्किल दौर से गुजर रहा है

चार्ल्स मैथीज जोकि एकेडमी ऑफ फिनलैंड के रिसर्च फेलो हैं. वो जानकारी देते हुए बताते हैं कि 'बिजनेस और सरकार की नीतियों के कारण आज फिनलैंड परेशानी के दौर से गुजर रहा है. सरकार की कई वर्षों की निष्क्रियता के बाद यहां की आबादी बुजुर्ग हो रही है. हमें कामगारों की सख्त जरूरत है. 2013 में आठ स्पेनिश नर्सों में पांच को पश्चिमी शहर वासा में भर्ती किया गया था. कुछ महीनों के बाद उन्होंने मंहगाई, अत्यधिक ठंडे मौसम और जटिल भाषा का हवाला देते हुए नौकरी और देश छोड़ दिया.


हेलसिंकी के मेयर जान वापावुरी ने एएफपी से कहा- 'स्टार्टअप्स ने बताया है कि वे दुनिया में किसी को भी आने और उनके लिए हेलसिंकी में काम तलाशने में मदद कर सकते हैं, लेकिन व्यक्ति को अकेले आना होगा. उनकी पत्नी या पति को नौकरी पाने में दिक्कत आती है. इस वजह से भी लोग फिनलैंड नहीं बसना चाह रहे हैं.

जान वापावुरी 4 बार से हेलसिंकी के मेयर रह चुके हैं. वो कहते हैं कि हमने अपने शहर की छवि बदलने के लिए अंतर्राष्ट्रीय पीआर कंपनी का सहारा लिया है. हमें उम्मीद है कि कोरोना संक्रमण के बाद एशियाई प्रवासी इस देश में आएंगे.

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