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बिहार की सियासत में फिर छिड़ी है नई जंग! जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) ने AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी पर सीधा वार किया है। किशनगंज की सभा में PK ने कहा — “अगर ओवैसी साहब हैदराबाद संभाल लेते, तो सीमांचल में कंफ्यूजन फैलाने की जरूरत नहीं पड़ती!” यानी सीधा संदेश — बिहार की राजनीति में बाहरी नेताओं की कोई जगह नहीं!
PK का तंज और बयान की गूंज
किशनगंज की सभा में प्रशांत किशोर ने असदुद्दीन ओवैसी को खुली चुनौती देते हुए कहा — “ओवैसी मेरे मित्र हैं, पर मैं उन्हें सलाह दूंगा — पहले अपना हैदराबाद संभालिए, बेकार में सीमांचल में आकर कंफ्यूजन मत फैलाइए!” राजनीति में दौरे नहीं, भरोसे की जरूरत होती है — और वो भरोसा सीमांचल के लोग अब अपने बेटे पर ही करेंगे!”
PK का यह बयान सीधा सीमांचल के मुस्लिम वोट बैंक पर वार था, जहां AIMIM ने 2020 के विधानसभा चुनाव में मजबूत एंट्री की थी। लेकिन इस बार PK ने साफ कहा — “सीमांचल के मुसलमान 2020 की गलती अब नहीं दोहराएंगे।”
बिहार से तेलंगाना तक की सियासी लाइन
प्रशांत किशोर ने ओवैसी को याद दिलाया कि अगर वाकई मुसलमानों के हित की लड़ाई लड़नी है, तो पहले अपने तेलंगाना और हैदराबाद में कुछ कर दिखाइए। उन्होंने कहा —“अगर आप हैदराबाद में मुसलमानों का भला कर दिए होते, तो बढ़िया होता। सीमांचल में नया नेता बनाने मत आइए। नेतृत्व वही असली है, जो दूर से नहीं, अपने लोगों के बीच खड़ा रहता है!” PK ने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल में भी जब ओवैसी और ISF चुनाव मैदान में उतरे थे, तो वहां की जनता ने कहा — हमें TMC पर भरोसा है, BJP से हमारी लड़ाई है। और नतीजा? ओवैसी बंगाल में कुछ भी नहीं कर पाए।
सीमांचल के वोटरों को PK की अपील
अब प्रशांत किशोर ने सीमांचल के वोटरों से सीधा संदेश दिया — “भाजपा से मत डरो, सिर्फ अल्लाह से डरो!” उन्होंने कहा — गठबंधन वाले कहते हैं कि हमें वोट दो, हम BJP से बचाएंगे, लेकिन जन सुराज पार्टी कहती है — डरिए मत, सही आदमी को जिताइए। PK बोले — “अगर तादाद की चिंता की गई होती, तो इस्लाम धर्म की शुरुआत ही नहीं होती। इसलिए हक के साथ खड़े रहिए, और जो सही है, उसका साथ दीजिए। डर से नहीं, हक से राजनीति बदलती है — और यही सीमांचल की असली ताकत है!”
राजनीतिक संदेश और असर
PK के इस बयान ने बिहार की सियासत में हलचल मचा दी है। एक तरफ वो खुद को सीमांचल का सच्चा बेटा बता रहे हैं, तो दूसरी ओर ओवैसी की पार्टी को “बाहरी दखल” कहकर घेर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान मुस्लिम वोटरों को दो हिस्सों में बांट सकता है — एक तरफ AIMIM का जनाधार और दूसरी तरफ PK की जन सुराज की नई रणनीति। बिहार में अब वोट की लड़ाई नहीं, भरोसे की परीक्षा चल रही है।
तो सवाल यही है — क्या सीमांचल के मुसलमान इस बार वाकई 2020 की गलती नहीं दोहराएंगे? क्या PK की अपील असर दिखाएगी? या ओवैसी फिर से सीमांचल में अपना जनाधार मजबूत करेंगे? राजनीतिक जंग शुरू हो चुकी है,
और अब हर बयान चुनावी नतीजों को दिशा दे सकता है। बिहार की सियासत में बयान नहीं, अब भरोसा ही सबसे बड़ा हथियार बन चुका है। अगर आपको ये रिपोर्ट पसंद आई हो तो वीडियो को लाइक करें, कमेंट में बताएं — क्या ओवैसी का सीमांचल दौरा असर डालेगा?




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