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क्या आपके शहर या गाँव में लव मैरिज करना गुनाह माना जाता है? मध्य प्रदेश में तो जैसे इसे सबसे बड़ा अपराध समझ लिया गया! हाल ही में ऐसा मामला सामने आया, जहाँ प्यार करने की “सज़ा” बाकायदा लिखकर दी गई। हर एक “गुनाह” के सामने तय की गई अलग-अलग सज़ा… आख़िर क्या हैं वो सज़ा? और जब मामला पुलिस तक पहुँचा, तो पुलिस ने क्या एक्शन लिया? चलिए, आपको बताते है आखिर क्या हैं पूरा मामला।
मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के पंचेवा गांव में ग्रामीणों ने ऐसा फरमान जारी किया है, जिसे सुनकर हर कोई चौंक गया। गांव में ऐलान किया गया कि अगर कोई लड़का या लड़की अपनी मर्जी से भागकर शादी करता है, तो सिर्फ वही नहीं, बल्कि उसका पूरा परिवार सज़ा का हक़दार होगा। इस फरमान के मुताबिक, ऐसे परिवारों का सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा। 'लड़का-लड़की अगर भागकर शादी करते हैं तो परिवार को समाज से बाहर कर दिया जाएगा, उसके सदस्यों को कोई भी काम नहीं देगा. ऐसे परिवार को कोई दूध समेत अन्य खाने पीने की चीजें कोई नहीं देगा और न ही उनसे लेगा. कोई लीज पर खेज नहीं लेगा. साथ ही इस घर में किसी नाई या पंडित के जाने पर भी प्रतिबंध है'. परिवार को किसी भी सामाजिक या मांगलिक कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं किया जाएगा. विवाह में गवाह बनने वाले, साथ देने वाले या दंपती को संरक्षण देने वालों का भी सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा.
ये मामला तब सामने आया जब गांव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। गांव का एक व्यक्ति रजिस्टर लेकर बहिष्कार के बिंदुओं को पढ़ता नजर आ रहा है. वीडियो में ग्रामीणों की भीड़ जमीन पर बैठे हुए नजर आ रही है और एक युवक उनके बीच में खड़ा होकर तेजी से यह फरमान पढ़़ रहा है. वीडियो के अनुसार, समस्त ग्राम पांचवा की ओर से यह फैसला लिया गया है कि गांव के भी लड़का-लड़की भागकर शादी करेंगे, उनके साथ-साथ उनके पूरे परिवार पर भी सजा के तौर पर प्रतिबंध लगाया जाएगा.
वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन हरकत में आया। वीडियो सामने आने के बाद सीईओ ब्रह्म स्वरूप हंस गांव पहुंचे. हालांकि सरपंच और ग्रामीणों का कहना है कि ये सिर्फ “समझाइश” और “बचाव” के लिए किया गया था, लेकिन प्रशासन ने साफ कहा है—संविधान से ऊपर कोई गांव का नियम नहीं हो सकता। अधिकारियों ने वीडियो के आधार पर फरमान जारी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है। वहीं, जिन परिवारों के नाम इस बैठक में सार्वजनिक रूप से लिए गए थे, उनमें भारी गुस्सा और डर का माहौल है। कई लोगों ने इस फरमान को मानवाधिकारों का हनन और संविधान विरोधी बताया है। पीड़ित परिवार अब इस “फरमान” के खिलाफ जिला कलेक्टर से शिकायत करने की तैयारी में हैं।
अब सवाल आपसे है—
1) क्या आज के समय में ऐसे नियम लागू होने चाहिए?
2) क्या प्रेम विवाह करना वाकई गुनाह है?
अपनी राय कमेंट में ज़रूर बताइए।




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