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कांग्रेस की पूर्व नेता और पूर्व विधायक डॉ. नवजोत कौर सिद्धू ने पंजाब की राजनीति में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए अपनी खुद की स्वतंत्र राजनीतिक पार्टी बनाने की घोषणा की। यह कदम उनके फरवरी 2026 में कांग्रेस पार्टी के आंतरिक मामलों को लेकर इस्तीफा देने के कई महीनों बाद आया है। उन्होंने संकेत दिया था कि पार्टी में होनहार नेताओं को आगे बढ़ाने के लिए उनके पास कोई जगह नहीं थी, और उन पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे थे, जिसके चलते उन्हें आधिकारिक तौर पर पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था।
नवजोत कौर सिद्धू, जिन्होंने 'पंजाबियत' और विकास की एक मजबूत छवि बनाई है, ने अपनी नई पार्टी का एजेंडा राज्य के वास्तविक मुद्दों पर आधारित रखा है, जिसमें वंशवाद की राजनीति और धन-बल का कोई स्थान नहीं है। उन्होंने पंजाब को एक 'स्वर्ण राज्य' बनाने के बारे में ज़ोरदार ढंग से बात की है और परोक्ष रूप से कांग्रेस तथा अन्य पार्टियों, दोनों पर निशाना साधा है।
हालांकि पार्टी का नाम, चुनाव चिह्न और पूरा एजेंडा संभवतः निकट भविष्य में ही सामने आएगा, लेकिन कहा जा रहा है कि यह पार्टी भविष्य के चुनावों में एक बड़ी चुनौती पेश करेगी, जिसका मुख्य ज़ोर महिला सशक्तिकरण, किसानों के मुद्दों और सुशासन पर होगा। उनके पति नवजोत सिंह सिद्धू भी सक्रिय राजनीति से दूर हैं और कथित तौर पर मनोरंजन के क्षेत्र में व्यस्त हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस नए मोर्चे में वोटों को बांटने और पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक उथल-पुथल को और बढ़ाने की क्षमता है। इस मोर्चे के लॉन्च को लेकर राज्य में पहले से ही दिलचस्पी और विवाद पैदा हो गए हैं, जिसके चलते पंजाब में एक बार फिर से बड़े पैमाने पर राजनीतिक समीकरणों में बदलाव देखने को मिलेगा।




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