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2 अप्रैल, 2026 को आम आदमी पार्टी (AAP) ने अचानक राघव चड्ढा को राज्यसभा में अपने उप-नेता के पद से हटा दिया, और उनकी जगह पंजाब के सांसद अशोक मित्तल को यह ज़िम्मेदारी सौंप दी। पार्टी ने आधिकारिक तौर पर राज्यसभा सचिवालय को इस बदलाव की सूचना दी और अनुरोध किया कि अब से AAP के कोटे के तहत बोलने का समय चड्ढा को आवंटित न किया जाए। हालाँकि AAP के नेताओं—जिनमें मित्तल भी शामिल हैं—ने इस बदलाव को एक सामान्य संगठनात्मक कदम बताया, जिसका उद्देश्य अधिक से अधिक नेताओं को ज़िम्मेदारी सौंपना है, लेकिन कई रिपोर्टें कुछ और ही संकेत दे रही हैं। बताया जा रहा है कि चड्ढा की ओर से पार्टी के अहम मुद्दों—जैसे अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया से जुड़े आबकारी नीति मामले—पर लंबे समय तक चुप्पी साधे रखना, और केजरीवाल के नेतृत्व में आयोजित कुछ बड़े कार्यक्रमों में उनकी गैर-मौजूदगी ही उन दोनों के बीच तनाव का मुख्य कारण बनी। केजरीवाल के बेहद करीबी माने जाने वाले चड्ढा ने हाल के दिनों में संसद के भीतर AAP के बुनियादी अभियानों के बजाय आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों—जैसे पितृत्व अवकाश (paternity leave), 'गिग वर्कर्स' (अस्थायी कर्मचारियों) के अधिकार और खाद्य पदार्थों की कीमतों—पर ज़्यादा ध्यान देना शुरू कर दिया था। ऐसा माना जा रहा है कि इसी तरह के भटकाव और पार्टी के अनुशासन व निर्देशों के प्रति उनकी निष्ठा पर उठे सवालों के कारण ही नेतृत्व में यह बदलाव किया गया, जिससे पार्टी के भीतर अंदरूनी फूट की अटकलें भी तेज़ हो गई हैं। इस पूरे घटनाक्रम पर चड्ढा की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है।




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