Story Content
16 से 18 अप्रैल, 2026 तक, भारत सरकार ने 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' (महिला आरक्षण अधिनियम, 2023) में संशोधन करने के लिए संसद का एक विशेष सत्र बुलाया है। इसका मुख्य उद्देश्य 2029 के आम चुनावों से पहले लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% कोटा लागू करना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सत्र को दशकों के इंतज़ार को खत्म करने और भारतीय लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाकर उसे और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया है। संविधान में प्रस्तावित संशोधनों के तहत लोकसभा को और अधिक मज़बूत किया जाएगा (जिसमें सीटों की संख्या बढ़ाकर 816-850 तक की जा सकती है) और आरक्षण को शामिल करने के लिए 'परिसीमन' भी किया जाएगा।
सत्ताधारी दल BJP और विपक्षी दलों (जैसे कांग्रेस) ने अपने सांसदों के लिए 'व्हिप' भी जारी कर दिया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी सांसद सत्र में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें। हालाँकि सरकार इस मुद्दे पर बातचीत और आम सहमति बनाने पर ज़ोर दे रही है कि परिसीमन प्रक्रिया कैसे पूरी की जाए और इसका क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व पर क्या असर पड़ेगा, फिर भी कुछ चिंताएँ बनी हुई हैं।
इस सत्र में मिलने वाली सफलता महिला-नेतृत्व वाले विकास के इतिहास में एक अहम पड़ाव साबित हो सकती है, जहाँ लाखों महिलाएँ सशक्त होंगी और आने वाले सालों में भारत में राजनीतिक प्रतिनिधित्व का स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा। यह देखने वाली बात होगी कि क्या इस क्रांतिकारी सुधार को लोगों की सहमति मिल पाती है या नहीं; इसका पता आने वाले दिनों में चलेगा।




Comments
Add a Comment:
No comments available.