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चेन्नई: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 का नतीजा 'हंग' रहा है, जिसमें कोई भी पार्टी या गठबंधन बहुमत के लिए ज़रूरी 118 सीटें हासिल नहीं कर पाया। अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी 'तमिलगा वेट्री कज़गम' (TVK) 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन वह बहुमत के आंकड़े (165 सीटें) से 10 सीटें पीछे रह गई।
सत्ताधारी DMK पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन ने लगभग 73 सीटों पर कब्ज़ा किया, जबकि AIADMK गठबंधन को लगभग 53 सीटें मिलीं। इस खंडित जनादेश के कारण चुनाव के बाद होने वाले संभावित गठबंधनों और 'हॉर्स-ट्रेडिंग' (खरीद-फरोख्त) को लेकर काफी अटकलें लगाई जा रही हैं, क्योंकि पार्टियां सरकार बनाने का दावा पेश करने की होड़ में लगी हैं।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि TVK को, अपने शानदार चुनावी पदार्पण के बावजूद, अगली सरकार बनाने के लिए शायद छोटी पार्टियों या निर्दलीय उम्मीदवारों के समर्थन की आवश्यकता पड़ेगी। इस बीच, DMK और AIADMK, दोनों ही खेमे इस अस्थिर स्थिति को देखते हुए अपने विकल्पों का मूल्यांकन कर रहे हैं।
इस घटनाक्रम ने तमिलनाडु के राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत दिया है—न केवल इसने राज्य में दो प्रमुख दलों के वर्चस्व को समाप्त किया है, बल्कि राज्य की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत भी की है, जो कि 'गठबंधन की राजनीति' का युग है। अब सबकी निगाहें राज्यपाल और पर्दे के पीछे होने वाले उन सौदों पर टिकी हैं, जिनसे यह तय होगा कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन बनेगा।




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