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भारत में शतरंज का ग्रैंडमास्टर (GM) बनने में बहुत अधिक खर्च आता है। युवा GM अरण्याक घोष के पिता द्वारा हाल ही में किए गए खुलासों के आधार पर, परिवारों को बच्चे की शुरुआत से लेकर शतरंज में यह खिताब हासिल करने तक कम से कम 70 लाख रुपये खर्च करने के लिए तैयार रहना चाहिए। उनके अपने परिवार का ही 15 वर्षों में लगभग 46 लाख रुपये का खर्च आया था।
मुख्य खर्चों में उच्च-स्तरीय कोचिंग (1500-15000 रुपये प्रति सत्र), राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट तथा प्रवेश शुल्क (1200-12000 रुपये प्रति इवेंट), व्यापक यात्रा और रहने का खर्च (प्रति विदेशी 'नॉर्म' टूर्नामेंट 3-5 लाख रुपये), सॉफ्टवेयर/किताबें और जीवन-यापन का खर्च शामिल हैं। सबसे बड़ी वित्तीय बाधा तीन GM 'नॉर्म्स' (प्रदर्शन रेटिंग 2600+) हासिल करना है, जो कि शक्तिशाली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगियों के बीच हासिल करने होते हैं।
हालांकि सरकारी प्रोत्साहन कम हो गए हैं, फिर भी शीर्ष खिलाड़ियों को अक्सर प्रायोजकों या परिवार के समर्थन की आवश्यकता होती है। आज भारत में शतरंज अब गंभीर खिताब के दावेदारों के लिए कोई सस्ता शौक नहीं रह गया है।




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