Story Content
पायल नाग, 18 साल की एक पैरा-तीरंदाज, जिसने अभी-अभी दुनिया में इतिहास रच दिया है। वह दुनिया की एकमात्र ऐसी अंतरराष्ट्रीय तीरंदाज बन गई हैं, जिनके शरीर के चारों अंग नहीं हैं। पायल ने अपने दोनों हाथ-पैर तब खो दिए थे, जब वह करीब 5-8 साल की थीं। यह हादसा तब हुआ, जब उन्होंने ज़मीन पर पड़े एक हाई-वोल्टेज बिजली के तार को छू लिया था। यह घटना किसी कंस्ट्रक्शन साइट या ईंट के भट्ठे पर हुई थी, जहाँ उनके पिता (विजय) एक प्रवासी मज़दूर के तौर पर काम करते थे। उनकी माँ का नाम जनता नाग है। उन्हें एक सरकारी अनाथालय में रखा गया था। उस समय उन्होंने सबसे पहले लोगों का ध्यान अपनी ओर तब खींचा, जब उन्होंने अपने पैरों से चित्र बनाना शुरू किया। उस समय वह बेहद मुश्किल हालात से गुज़र रही थीं। पायल ने 2023 में तीरंदाज़ी का खेल शुरू किया। उन्हें पैरा-आर्चर शीतल देवी के वीडियो देखकर प्रेरणा मिली थी। शीतल देवी ने 2020 में कोच कुलदीप वेदवान की मदद से यह खेल शुरू किया था। कुलदीप ने उनके लिए खास तरह के उपकरण बनाए थे, जिनकी मदद से वह प्रोस्थेटिक सपोर्ट के सहारे धनुष पकड़ पाती थीं और अपने मुँह से तीर चला पाती थीं। बैंकॉक में हुई Hyundai World Archery Para Series 2026 में अपने पहले अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में ही पायल ने शानदार प्रदर्शन किया। कंपाउंड महिला फ़ाइनल में उन्होंने दुनिया की नंबर 1 और अपनी ही टीम की मशहूर खिलाड़ी शीतल देवी को 139-136 से हरा दिया। इस प्रतियोगिता में भारत कुल सात गोल्ड मेडल जीतकर सबसे आगे रहा। उनकी हिम्मत और हौसले की यह प्रेरणादायक कहानी लाखों लोगों को प्रेरित कर चुकी है। यह साबित करती है कि पैरा-स्पोर्ट्स में पक्का इरादा ही सबसे बड़ी ताकत होती है। अब पायल की नज़रें और भी बड़े मंच पर हैं, जिसमें भविष्य में होने वाले पैरालंपिक खेलों में देश का नाम रोशन करना भी शामिल है।




Comments
Add a Comment:
No comments available.