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'महिला श्रेणी के संरक्षण' (Protection of the Female Category) से जुड़ी इस पॉलिसी के तहत, अब सिर्फ़ बायोलॉजिकल महिलाएं ही व्यक्तिगत या टीम खेलों की महिला श्रेणी में हिस्सा लेने के लिए पात्र होंगी। इसकी पुष्टि SRY जीन की अनिवार्य और एक बार की स्क्रीनिंग के ज़रिए की जाएगी (यह एक तरह का DNA टेस्ट है, जो आमतौर पर लार, गाल के स्वैब या खून के नमूने से किया जाता है)।
IOC का दावा है कि इस कदम का मकसद खेलों में महिलाओं के लिए समानता, सुरक्षा और गरिमा सुनिश्चित करना है। ऐसा इसलिए किया गया है, क्योंकि महिला खेलों में हिस्सा लेने वाले पुरुषों के पास शारीरिक रूप से ज़्यादा ताकत, शक्ति और सहनशक्ति जैसे फायदे मौजूद होते हैं। यह पॉलिसी पिछली तारीख से लागू नहीं होगी, और इसका ज़मीनी स्तर या मनोरंजक खेलों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। यह पॉलिसी 'यौन विकास में अंतर' (DSD) वाले कुछ खिलाड़ियों पर भी लागू होगी।
IOC की अध्यक्ष Kirsty Coventry ने बताया कि ओलंपिक में छोटे से छोटा अंतर भी मायने रखता है, और इसलिए महिला श्रेणी की प्रतियोगिताओं में बायोलॉजिकल पुरुषों को शामिल करना सही नहीं है। यह फैसला दुनिया भर में एलीट खेलों में 'लिंग-आधारित वर्गीकरण' पर बढ़ रहे ध्यान के अनुरूप है।




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