Story Content
उज़्बेकिस्तान के समरकंद में हुए 46वें शतरंज ओलंपियाड में भारत की ओपन टीम ने रजत और महिला टीम ने कांस्य पदक जीता। दोनों टीमों के कुछ खिलाड़ी बीमारी से जूझते हुए खेले। इनमें सबसे मुश्किल दौर कोनेरू हंपी का रहा, जो लगभग पूरे टूर्नामेंट के दौरान अस्वस्थ रहीं, फिर भी 10 में से 7 अंक बनाकर टीम और व्यक्तिगत, दोनों कांस्य पदक अपने नाम किए।
हंपी ने बताया कि ओलंपियाड से पहले उन्होंने ग्लोबल चेस लीग, यूएस केयर्न्स कप और फ्रांस का एक टूर्नामेंट खेला था, और बीच में घर पर सिर्फ चार-पांच दिन रह पाईं। उन्होंने पिछले दो महीनों के शेड्यूल को बेहद थकाने वाला बताया।
छठे राउंड के बाद मिले एकमात्र रेस्ट डे के बाद वे पूरी तरह बीमार पड़ गईं। उन्हें दस्त और पेट दर्द की शिकायत थी और वे दवाइयां लेकर खेलती रहीं। उनके मुताबिक़ अगर यह किसी निजी टीम का मुक़ाबला होता तो वे आराम कर लेतीं, पर भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए टॉप बोर्ड पर उनकी मौजूदगी ज़रूरी थी। वैशाली की हालत भी ठीक नहीं थी, इसलिए उन्होंने आराम के बारे में सोचा ही नहीं।
मैच के दौरान दवा लेते हुए उनका एक वीडियो भी सामने आया। हंपी ने बताया कि उन्हें एंटीबायोटिक नहीं मिल पा रही थी और खेल से ठीक पहले एक भारतीय दोस्त ने उसका इंतज़ाम किया। 39 साल की हंपी का मानना है कि कई महीनों तक बाहर का खाना खाने का असर हो सकता है, क्योंकि टूर्नामेंट के सफ़र में इससे बचना मुश्किल होता है। एंटीबायोटिक शुरू करने के बाद आख़िरी राउंड में उनकी तबीयत काफ़ी बेहतर थी।
आख़िरी राउंड में उन्होंने जॉर्जिया की नाना जगनिद्ज़े को सिर्फ़ 25 चालों में हराकर व्यक्तिगत कांस्य पक्का किया।
ओपन टीम के बोर्ड-1 खिलाड़ी रमेशबाबू प्रज्ञानानंदा भी सर्दी और बुखार के बावजूद खेले और टीम रजत के साथ व्यक्तिगत कांस्य भी जीता।
स्रोत: Times of India




Comments
Add a Comment:
No comments available.