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एमेच्योर और ओलंपिक-स्टाइल बॉक्सिंग में, 2016 रियो गेम्स के बाद पुरुषों ने हेडगियर पहनना बंद कर दिया, जबकि महिलाओं ने सालों तक इसका इस्तेमाल जारी रखा। पुरुषों के लिए यह बदलाव उस रिसर्च के बाद आया जिसमें पता चला कि हेडगार्ड से सिर की चोट (concussion) का खतरा बढ़ सकता है। वे सिर को एक बड़ा टारगेट बनाते हैं और फाइटर्स को सुरक्षा का झूठा एहसास दिला सकते हैं, जिससे वे ज़्यादा जोखिम भरा व्यवहार करते हैं और दिमाग पर ज़्यादा रोटेशनल फोर्स (घूमने वाला दबाव) पड़ता है।
हालांकि, यह अहम अध्ययन केवल पुरुष बॉक्सरों पर किया गया था। चूंकि महिलाओं के लिए ऐसा कोई डेटा मौजूद नहीं था, इसलिए गवर्निंग बॉडीज़ ने सावधानी के तौर पर महिला खिलाड़ियों के लिए हेडगियर का नियम बनाए रखा।
2024 में इंटरनेशनल बॉक्सिंग एसोसिएशन (IBA) ने एलीट महिला इवेंट्स से भी हेडगार्ड हटाने के लिए वोट किया, जिससे नियम एक जैसे हो गए। इसे धीरे-धीरे लागू किया जा रहा है, इसलिए कुछ प्रतियोगिताओं में अब भी इनकी ज़रूरत होती है। यह अंतर कभी भी शारीरिक कमज़ोरी के कारण नहीं था — यह अधूरी रिसर्च और एथलीट की सुरक्षा को लेकर सावधानी बरतने की वजह से था।




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