Monastery: वेकेशन शांति से बिताने चाहते है तो लद्दाख के आसपास इन बौद्ध मठों की जरूर करें सैर

त्योहारी सीजन चल रहा है. इस मौसम में लोग वेकेशन पर जाना पसंद करते हैं. इस मौके पर लोग पिकनिक स्पॉट, हिल स्टेशन और धार्मिक स्थलों पर जाते हैं. शांति और सुकून के स्थानों पर जाना चाहते हैं, तो आप लद्दाख के आसपास के इन बौद्ध मठों की धार्मिक यात्रा कर सकते है

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त्योहारी सीजन चल रहा है. इस मौसम में लोग वेकेशन पर जाना पसंद करते हैं. इस मौके पर लोग पिकनिक स्पॉट, हिल स्टेशन और धार्मिक स्थलों पर जाते हैं. अगर आप भी आने वाले दिनों में घूमने की योजना बना रहे हैं, लेकिन शांति और सुकून के स्थानों पर जाना चाहते हैं, तो आप लद्दाख के आसपास के इन बौद्ध मठों की धार्मिक यात्रा कर सकते हैं. आइए जानते हैं उनके बारे में सबकुछ-

की मठ

यह हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति में सबसे बड़ा मठ है. इसकी ऊंचाई समुद्र तल से 4,166 मीटर है. इस मठ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह 1 हजार साल पुराना है. इसके बावजूद यह मठ आज भी बेहद खूबसूरत है. मठ 11वीं शताब्दी में बनाया गया था. मठ में आज भी प्राचीन पेंटिंग और बौद्ध स्क्रॉल उपलब्ध हैं. इस मठ में हर साल 300 लामाओं को धार्मिक ज्ञान देकर प्रशिक्षित किया जाता है. अगर आप शांति और सुकून की तलाश में हैं तो आप मठ की धार्मिक यात्रा पर जा सकते हैं.

ताबो मठ

यह मठ भारत के प्राचीन मठों में भी गिना जाता है. यह मठ स्पीति नदी के तट पर स्थित है. इस मठ को यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल किया गया है. इस मठ की स्थापना वर्ष 996 में लोचावा रिंगचेन जांगपो ने की थी. इस तरह यह मठ भी एक हजार साल पुराना है. ताबो मठ में कुल 9 मंदिर हैं. इनमें से 3 मंदिरों में मूर्तियां स्थापित हैं. इनमें चुलखंड मंदिर में बुद्ध के पूरे जीवन को एक चित्र के माध्यम से बताने का प्रयास किया गया है.

लामायुरु मठ

यह मठ कश्मीर के लेह से महज 127 किमी दूर लामायुरु गांव में स्थित है. इस गांव के नाम पर मठ का नाम रखा गया है. इसकी ऊंचाई समुद्र तल से 3,510 मीटर है. लामायुरु गांव को अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए मूनलैंड के नाम से भी जाना जाता है. इस मठ की स्थापना 11वीं शताब्दी में हुई थी. यह लद्दाख में स्थित सबसे पुराना मठ है.

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