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भारत में नए लेबर कोड्स का एक अहम प्रावधान 50% बेसिक पे नियम है, जो 2025 के आखिर से लेकर 2026 तक (नए लेबर कोड्स के साथ) अलग-अलग चरणों में लागू होगा; इनमें सबसे खास है 'वेतन संहिता, 2019' (Code on Wages, 2019)।
यह वेतन की एक मानक परिभाषा तय करता है, ताकि कुल वेतन (बेसिक पे + महंगाई भत्ता/DA + रिटेनिंग अलाउंस) कर्मचारी की कुल सैलरी (CTC) का कम से कम आधा हो।
जब भत्ते (जैसे HRA, विशेष भत्ता और कन्वेंस अलाउंस) CTC के 50% से ज़्यादा हो जाते हैं, तो अतिरिक्त भत्तों को अपने-आप ही वेतन के आधार (wage base) में जोड़ दिया जाता है। इसी आधार पर भविष्य निधि (PF), ग्रेच्युटी और ओवरटाइम जैसे वैधानिक लाभों की गणना की जाती है।
पहले कंपनियाँ (खासकर IT इंडस्ट्री और प्राइवेट सेक्टर में) बेसिक पे को काफी कम (30-40%) रखती थीं, ताकि कर्मचारियों को दी जाने वाली कुल रकम को कम किया जा सके। यह नया नियम इस तरह की मनमानी पर रोक लगाएगा, जिससे कर्मचारियों को मिलने वाले सामाजिक सुरक्षा लाभ ज़्यादा निष्पक्ष और उचित हो जाएँगे। परिणाम: PF और ग्रेच्युटी की राशि बढ़ जाएगी, लेकिन इसके साथ ही आपकी मासिक 'टेक-होम सैलरी' (हाथ में आने वाली सैलरी) कम हो सकती है, क्योंकि ज़्यादा पैसा सैलरी के उस हिस्से में चला जाएगा जिस पर टैक्स लगता है (taxable basic component)। इन नियमों का पालन करने के लिए, 2026 में नियोक्ता (employers) सैलरी स्लिप में बदलाव कर रहे हैं।




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