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नो-कॉस्ट EMI का सच: "ज़ीरो इंटरेस्ट" ऑफ़र्स के पीछे की चौंकाने वाली सच्चाई, जो बैंक और मर्चेंट आपको नहीं बताना चाहते!

इंटरेस्ट-फ़्री EMI पेमेंट का एक ऐसा विकल्प है जिससे आप उधार पर खरीदारी कर सकते हैं, लेकिन यह असल में मुफ़्त नहीं होती। इंटरेस्ट का खर्च रिटेलर उठाता है, या तो वह प्रोडक्ट की कीमत बढ़ाकर ऐसा करता है, या फिर कैश पेमेंट पर मिलने वाले डिस्काउंट को हटाकर।

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By Jigyasa Sain | Faridabad, Haryana | व्यापार - 28 April 2026


"इंटरेस्ट-फ़्री EMI" या "नो-कॉस्ट EMI" भारत में Amazon, Flipkart और क्रेडिट कार्ड के ज़रिए खरीदारी करने का सबसे लोकप्रिय फ़ाइनेंसिंग विकल्प है। लेकिन क्या यह सच में इंटरेस्ट-फ़्री है?

इसका असल मतलब क्या है:

बैंक उधार दी गई रकम पर सामान्य इंटरेस्ट (12-18%) वसूलता है, लेकिन इस इंटरेस्ट का भुगतान मर्चेंट (या बैंक) द्वारा किया जाता है। आपको बस EMI के रूप में मूलधन (principal amount) चुकाना होता है। लेकिन यह खर्च किसी न किसी रूप में आप पर ही डाल दिया जाता है।

छिपी हुई सच्चाई:

  • EMI पर प्रोडक्ट की कीमत कैश पेमेंट की तुलना में ज़्यादा हो सकती है (क्योंकि कैश डिस्काउंट नहीं मिलता)।
  • इंटरेस्ट पर GST भी देना पड़ सकता है।
  • आपसे प्रोसेसिंग फ़ीस, लेट फ़ीस और लॉक-इन फ़ीस भी वसूली जा सकती है।
  • इससे आपके क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल बढ़ जाता है, और अगर आप समय पर पेमेंट नहीं करते हैं, तो आपके CIBIL स्कोर पर भी इसका बुरा असर पड़ सकता है।

फ़ाइनेंशियल एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि नो-कॉस्ट EMI का विकल्प चुनने से पहले, कुल लागत की तुलना कैश पेमेंट वाली कीमत से ज़रूर कर लें। अगर आप अपने खर्चों को लेकर अनुशासित हैं, तो बड़ी खरीदारी के लिए यह एक अच्छा विकल्प है, लेकिन यह पूरी तरह से "मुफ़्त" नहीं है। हमेशा नियम और शर्तों (fine print) को ध्यान से पढ़ें!

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