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Bihar News: बिहार के गया शहर में नशीली दवाओं के कथित अवैध कारोबार को लेकर हुई कार्रवाई ने प्रशासन और पुलिस महकमे में हलचल बढ़ा दी है। रंगबहादुर रोड और पिपरपांती इलाके में हुई छापेमारी के बाद जांच अब कई प्रभावशाली लोगों तक पहुंचती दिखाई दे रही है। पुलिस इस मामले को केवल अवैध दवा बिक्री नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क के तौर पर देख रही है।
जानकारी के मुताबिक, 25 मई को ड्रग विभाग और कोतवाली थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने पिपरपांती इलाके के एक मकान में छापा मारा। कार्रवाई के दौरान वहां से बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित और नशीली दवाएं बरामद की गईं। शुरुआती जांच में पता चला कि जिस मकान में यह गतिविधियां चल रही थीं, वह पूर्व सांसद के बेटे आनंद सिंह से जुड़ा बताया जा रहा है।
इस मामले में औषधि निरीक्षक सुनील कुमार की शिकायत पर कोतवाली थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। मामला एनडीपीएस एक्ट 1985 और बीएनएस की कई धाराओं के तहत दर्ज किया गया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि बरामद दवाओं की मात्रा और नेटवर्क का तरीका यह संकेत देता है कि यह कारोबार लंबे समय से संचालित हो सकता है।
एफआईआर में आनंद सिंह पर आरोप है कि उन्होंने बिना पूरी जांच-पड़ताल के विकास कुमार को मकान किराए पर दिया था। बाद में उसी स्थान से कथित रूप से नशीली दवाओं का कारोबार चलाया जाने लगा। हालांकि, अब तक उनकी सीधी संलिप्तता को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस फिलहाल किरायेदारी, आर्थिक लेनदेन और संदिग्ध संपर्कों की जांच कर रही है।
इस मामले में कुल आठ लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें आनंद सिंह, मोहम्मद आबिद अंसारी, राजेश कुमार उर्फ मुखिया, कुणाल कुमार, राजेंद्र कुमार शर्मा, विकास Kumar, रूबी देवी और मुकेश कुमार के नाम शामिल हैं। जांच एजेंसियों को शक है कि यह नेटवर्क शहर से बाहर भी फैला हो सकता है।
गया एसएसपी सुशील कुमार के अनुसार, अब तक छह आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। बाकी लोगों की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह गिरोह केवल अवैध दवा कारोबार तक सीमित था या युवाओं तक नशीले पदार्थ पहुंचाने का बड़ा माध्यम बन चुका था।
इस घटना के बाद गया शहर में अवैध मेडिकल नेटवर्क और नशीली दवाओं की बिक्री को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रिहायशी इलाकों में इस तरह की गतिविधियां प्रशासनिक निगरानी पर भी सवाल खड़े करती हैं। वहीं पुलिस का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस नेटवर्क से जुड़े और नाम सामने आ सकते हैं।




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