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तिब्बत सीमा के पास नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ में 150 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई है और सैकड़ों लोग लापता हैं। विशेषज्ञ इस अचानक आई आपदा के पीछे कई थ्योरी की जांच कर रहे हैं। सबसे मुख्य कारण हिमालय में ऊंचाई पर ग्लेशियर का बड़े पैमाने पर टूटना या बर्फ-चट्टान का एवलांच माना जा रहा है। ग्लेशियर का एक बड़ा हिस्सा टूटकर घाटी में गिरा, जिससे कुछ समय के लिए ल्हेन्डे नदी का बहाव रुक गया और फिर पानी और मलबे का तेज़ बहाव नीचे की ओर आया। इसका असर इतना ज़बरदस्त था कि शुरुआत में इसे 4.4 तीव्रता का भूकंप माना गया, लेकिन बाद में USGS ने स्पष्ट किया कि यह सिग्नल ग्लेशियर के टूटने से ही पैदा हुआ था। अन्य संभावनाओं में एवलांच से नदी का रास्ता रुकना और फिर अचानक पानी का बहाव छूटना, या ग्लेशियर झील का फटना (GLOF) शामिल है। ग्लेशियरों के पिघलने और पर्माफ्रॉस्ट (जमी हुई मिट्टी) के पिघलने के कारण जलवायु परिवर्तन को भी इसका एक कारण माना जा रहा है। चूंकि बाढ़ का पानी नारायणी-गंडक नदी प्रणाली में बहता है जो भारत में प्रवेश करती है, इसलिए बिहार और उत्तर प्रदेश को हाई अलर्ट पर रखा गया है और सीमावर्ती ज़िलों में NDRF की टीमें तैनात की गई हैं।




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