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अपनी सदस्य संख्या बढ़ाने के बाद, केंद्र सरकार ने संविधान (131वां संशोधन) बिल, 2026 के ज़रिए लोकसभा में भारी बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया है: सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 तक की जानी चाहिए। 16 अप्रैल से शुरू होने वाले संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र से पहले ही सांसदों को इस बिल का ड्राफ़्ट उपलब्ध करा दिया गया है।
इस प्रस्ताव के तहत, राज्यों को 815 सीटें और केंद्र शासित प्रदेशों को 35 सीटें आवंटित की जाएंगी। इस विस्तार का मुख्य उद्देश्य 2029 के आम चुनावों में 33% महिला आरक्षण (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को आसानी से लागू करना है। इसे 2011 की नई जनगणना के आंकड़ों पर आधारित एक नए परिसीमन अभ्यास के साथ-साथ लागू किया जाएगा, ताकि निर्वाचन क्षेत्रों को फिर से परिभाषित किया जा सके और सीटों का आनुपातिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो, जिसमें एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हों।
इस विधेयक का उद्देश्य संविधान के अनुच्छेद 81 और 82 में संशोधन करना है, ताकि सीटों के पुनर्समायोजन पर लगी उस रोक को हटाया जा सके जो अब तक लागू थी। जहाँ एक ओर सरकार इसे बेहतर प्रतिनिधित्व और महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम मानती है, वहीं विपक्षी दलों ने इस बात पर आपत्ति जताई है कि इससे विभिन्न क्षेत्रों—विशेषकर दक्षिणी राज्यों—के प्रतिनिधित्व में असंतुलन पैदा होने की आशंका है। अगला सत्र ही वह अवसर होगा, जब इस क्रांतिकारी सुधार पर ज़ोरदार बहस होगी।




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