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दिल्ली में सियासी सरगर्मी: TMC के बागी सांसदों की कथित बैठक
कोलकाता और दिल्ली की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब खबरें सामने आईं कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कम से कम 10 से अधिक सांसदों ने दिल्ली में एक बंद कमरे में बैठक की है।
सूत्रों के अनुसार यह बैठक बीजेपी नेता भूपेंद्र यादव के आवास के पास हुई बताई जा रही है। खास बात यह है कि उसी इलाके में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी अपने INDIA ब्लॉक सहयोगियों के साथ रणनीतिक बैठक कर रही थीं।
कौन-कौन नेता रहे मौजूद?
सूत्रों के मुताबिक इस कथित बैठक में कई प्रमुख TMC सांसद और नेता शामिल थे, जिनमें नाम सामने आए हैं:
शताब्दी रॉय
काकोली घोष दस्तीदार
अबू ताहेर खान
खलीलुर रहमान
असीत कुमार माल
अरूप चक्रवर्ती
कालिपदा सोरेन
जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया
प्रसून बनर्जी
शर्मिला सरकार
इसके अलावा कुछ अन्य नेताओं के भी शामिल होने की बात सामने आई है।
पार्टी में बढ़ता असंतोष और अंदरूनी खींचतान
सूत्रों के अनुसार, यह पहला मौका नहीं है जब TMC के भीतर असंतोष की खबरें आई हों।
करीब 20 सांसदों के कथित तौर पर अलग रुख अपनाने की बात
80 में से 60 से अधिक विधायकों के असंतोष में होने का दावा
कई नेताओं का पार्टी कार्यक्रमों से दूरी बनाना
इन घटनाओं ने पार्टी नेतृत्व के लिए चिंता बढ़ा दी है।
“Didi” से ‘नाम’ तक: बदलता राजनीतिक संबोधन
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा में है कि लंबे समय तक ममता बनर्जी को ‘दीदी’ कहकर संबोधित करने वाले कुछ नेता अब उन्हें उनके नाम से पुकारने लगे हैं।
इसे पार्टी के भीतर सम्मान और संबंधों में गिरावट के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
नेताओं की चुप्पी और संदिग्ध गतिविधियाँ
एक वरिष्ठ सांसद के मुंबई से कोलकाता लौटते समय दिल्ली में अचानक रुकने की खबर
कई नेताओं के फोन बंद होने या संपर्क से बाहर रहने की जानकारी
कुछ नेताओं द्वारा पार्टी गतिविधियों से दूरी बनाए जाने के संकेत
इन घटनाओं ने राजनीतिक अटकलों को और हवा दी है।
क्या TMC में बड़ी टूट संभव है?
सूत्रों के अनुसार, यह पूरा घटनाक्रम पार्टी के लिए एक गंभीर चुनौती बन सकता है। हालांकि अभी तक किसी भी नेता ने सार्वजनिक रूप से किसी भी प्रकार की बगावत या दल बदल की पुष्टि नहीं की है।
टीएमसी के भीतर चल रही इन कथित गतिविधियों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को एक बार फिर दिल्ली तक चर्चा का विषय बना दिया है। आने वाले दिनों में स्थिति साफ होगी कि यह सिर्फ अंदरूनी असंतोष है या किसी बड़े राजनीतिक बदलाव की शुरुआत।




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