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सितंबर 2024 में, 41 साल के उद्यमी मैथ्यू गैलाघर—जिनके पास कोई बड़ी डिग्री या वेंचर कैपिटल नेटवर्क नहीं था—ने लॉस एंजिल्स में अपने ही लिविंग रूम से Medvi लॉन्च किया। यह एक टेलीहेल्थ कंपनी है जिसका मुख्य फोकस GLP-1 वज़न घटाने वाली दवाओं पर है। उन्होंने पूरे ऑपरेशन को चलाने के लिए ChatGPT, Claude, Grok (कोडिंग), Midjourney (विज़ुअल्स), और स्टोर-विशिष्ट AI एजेंट्स (मार्केटिंग, कस्टमर सपोर्ट, शेड्यूलिंग और ऑपरेशंस के लिए) जैसे AI टूल्स का इस्तेमाल किया। यह सब उन्होंने सिर्फ $20,000 और एक लैपटॉप की मदद से किया, और इस पूरे काम में उन्हें सिर्फ दो महीने लगे।
उन्होंने साइट की 'वाइब-कोडिंग' की, AI की मदद से विज्ञापन और ब्रांडिंग की, और यहाँ तक कि अपनी आवाज़ की AI कॉपी का इस्तेमाल करके फ़ोन कॉल भी किए। यह कंपनी तेज़ी से बढ़ी और 250,000 ग्राहकों तक पहुँची। ऑपरेशन के पहले साल में ही इसने $401 मिलियन का राजस्व (revenue) दर्ज किया, जिसमें 16.2% का शुद्ध लाभ मार्जिन (net profit margin) था। यह Hims और Hers जैसी बड़ी प्रतिस्पर्धी कंपनियों के मार्जिन का लगभग तीन गुना है।
गैलाघर ने अपने एकमात्र फुल-टाइम कर्मचारी—अपने छोटे भाई इलियट—से सबका परिचय करवाया। वे कॉन्ट्रैक्ट इंजीनियरों और अकाउंट मैनेजरों के सहयोग पर निर्भर हैं, फिर भी मुख्य कारोबार AI ऑटोमेशन के ज़रिए ही चलता है। अनुमान है कि Medvi ने इस साल (2026) बिक्री के मामले में कुछ चौंकाने वाले स्तर हासिल कर लिए हैं।
यह The New York Times में छपी एक कहानी है, जो सैम ऑल्टमैन जैसे टेक्नोलॉजी लीडरों की उस भविष्यवाणी को सच साबित करती है कि AI की मदद से कोई एक व्यक्ति भी अरबों डॉलर का कारोबार खड़ा कर सकता है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे अब उद्यमिता की राह में आने वाली रुकावटें काफ़ी कम हो गई हैं, और कैसे छोटी-छोटी टीमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बदौलत अपनी ज़बरदस्त कार्यक्षमता और नए-नए आइडिया के दम पर बड़ी-बड़ी कंपनियों को टक्कर दे रही हैं।
हालांकि, टेलीहेल्थ के क्षेत्र में लंबे समय तक बने रहने वाले कानूनी और प्रतिस्पर्धी खतरों को लेकर कुछ चिंताएं ज़रूर हैं, लेकिन Gallagher की कहानी से यह साफ़ ज़ाहिर होता है कि AI के इस दौर में, अगर किसी व्यक्ति में कुछ कर दिखाने का जज़्बा हो और उसके पास स्मार्ट टूल्स तक पहुंच हो, तो वह सचमुच कुछ भी कर सकता है—ठीक वैसा ही, जिसके लिए पहले लोगों के पूरे समूह और ढेर सारे पैसों की ज़रूरत पड़ती थी। हो सकता है कि ये ही अगली पीढ़ी के ऐसे ज़बरदस्त असर डालने वाले स्टार्टअप्स हों, जो बेहद कम संसाधनों में काम करते हुए पूरे-पूरे उद्योगों की कायापलट कर रहे हैं।




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