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'सेल रिपोर्ट्स' (Cell Reports) में प्रकाशित एक नई स्टडी के बाद मछली के तेल के सप्लीमेंट्स पर सवाल उठ रहे हैं। साउथ कैरोलिना मेडिकल यूनिवर्सिटी की इस स्टडी के आधार पर शोधकर्ताओं ने यह निष्कर्ष निकाला है कि इकोसापेंटेनोइक एसिड, या EPA - जो मछली के तेल में पाया जाने वाला एक ओमेगा-3 है - सिर पर बार-बार हल्की चोट लगने के बाद दिमाग की मरम्मत की प्रक्रियाओं को धीमा कर सकता है।
शोधकर्ताओं ने पाया कि EPA का स्तर बढ़ने से रक्त वाहिकाओं की स्थिरता में कमी, मरम्मत के संकेतों में बाधा, और चूहों व इंसानी कोशिकाओं - दोनों में ही - विषाक्त 'टाऊ प्रोटीन' (जो न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों से जुड़ा है) का अधिक जमाव देखने को मिला। DHA के प्रभाव या तो सामान्य रहे या अलग-अलग तरह के, लेकिन EPA ने एक ऐसी चयापचय (metabolic) कमजोरी पैदा की, जो ठीक होने की प्रक्रिया में रुकावट डालती है।
ये नतीजे इस आम धारणा पर सवाल खड़े करते हैं कि मछली का तेल दिमाग के लिए हर हाल में फायदेमंद होता है। शोधकर्ता सावधानी बरतने की सलाह देते हैं, विशेष रूप से उन लोगों को जिन्हें बार-बार सिर पर चोट लगने का जोखिम रहता है - जैसे कि खेलों में हिस्सा लेने वाले लोग। इंसानों पर अभी और रिसर्च की ज़रूरत है, लेकिन अब तक मिले सबूतों से पता चलता है कि इस मामले को बारीकी से समझने की ज़रूरत है - हो सकता है कि कुछ स्थितियों में मछली का तेल फायदेमंद हो, लेकिन सिर पर गंभीर चोट लगने के बाद ठीक होने की प्रक्रिया में यह रुकावट भी डाल सकता है। कोई भी सप्लीमेंट लेने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।




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