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ज़रा सोचिए जब कोई आपको प्यार से गले लगाता है, तो मन अपने आप शांत क्यों हो जाता है? दिल का बोझ हल्का क्यों महसूस होता है? और तनाव जैसे अचानक गायब क्यों हो जाता है?
अब ये सिर्फ़ एहसास की बात नहीं है। साइंस ने इसे पूरी तरह साबित कर दिया है। जर्मनी की Ruhr University Bochum के वैज्ञानिकों ने एक बड़ी रिसर्च की। उन्होंने 137 अलग-अलग स्टडीज़ का विश्लेषण किया, जिनमें करीब 13,000 लोग शामिल थे। इस रिसर्च का नतीजा साफ था— छूना सिर्फ़ अच्छा महसूस कराने के लिए नहीं होता, यह शरीर और दिमाग दोनों को ठीक करता है। हम हमेशा से जानते थे कि hug, massage या किसी अपने का हाथ पकड़ना सुकून देता है, लेकिन अब साइंस कहती है कि ये सब एक तरह की थेरेपी हैं। Touch-based interventions हर उम्र के लोगों में मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं। नवजात बच्चों पर इसका असर सबसे गहरा देखने को मिला। मां की छाती से बच्चे का skin-to-skin contact, जिसे kangaroo care कहा जाता है, बच्चों के stress hormones को कंट्रोल करता है उनकी सांस लेने की प्रक्रिया सुधरती है और यहां तक कि लिवर जैसे ज़रूरी अंगों की कार्यक्षमता भी बेहतर हो जाती है। यानि मां का स्पर्श, कई बार दवाओं से भी ज़्यादा असरदार साबित होता है।
अब बात करते हैं बड़ों की। जो लोग चिंता, तनाव, डिप्रेशन या शारीरिक दर्द से जूझ रहे होते हैं, उनके लिए नियमित स्पर्श किसी इलाज से कम नहीं है। रिसर्च में पाया गया कि touch से anxiety कम होती है, depression में राहत मिलती है और लंबे समय से चल रहे दर्द में भी कमी आती है। सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि जो लोग पहले से किसी बीमारी या मानसिक परेशानी से जूझ रहे थे, उन पर touch का असर स्वस्थ लोगों की तुलना में कहीं ज़्यादा था। मतलब जब इंसान सबसे ज़्यादा टूटता है, तब एक स्पर्श सबसे ज़्यादा काम करता है। वैज्ञानिकों ने यह भी परखा कि अगर इंसान की जगह रोबोट द्वारा touch therapy दी जाए, तो क्या वही असर देखने को मिलेगा। रोबोटिक टच से थोड़ी physical राहत तो मिली, लेकिन emotional comfort लगभग न के बराबर रहा। खासतौर पर तब, जब तुलना किसी अपने या trained professional के स्पर्श से की गई। यह रिसर्च हमें एक सच्चाई याद दिलाती है। आज हम स्क्रीन की दुनिया में जी रहे हैं— मोबाइल, लैपटॉप और सोशल मीडिया के बीच। लेकिन इंसान डिजिटल नहीं, जैविक प्राणी है। हमें एक-दूसरे की ज़रूरत है। सुरक्षित और सहमति से किया गया स्पर्श, चाहे वो गले लगाना हो, हाथ पकड़ना हो या प्रोफेशनल मसाज, कोई लक्ज़री नहीं है। यह हमारे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य की ज़रूरत है। जब कोई आपको प्यार से छूता है, तो शरीर के अंदर बदलाव शुरू हो जाते हैं। Stress hormone cortisol कम होने लगता है। खुशी देने वाला hormone oxytocin रिलीज़ होता है। और आपका nervous system एक संदेश पाता है— कि आप सुरक्षित हैं, आप जुड़े हुए हैं, आप अकेले नहीं हैं। यही वजह है कि एक सच्चा hug कभी-कभी उन शब्दों और दवाओं से ज़्यादा असर कर जाता है, जो हम रोज़ तलाशते रहते हैं। इस रिसर्च ने वही बात साबित कर दी, जिसे हम दिल से हमेशा जानते थे, लेकिन भागती हुई ज़िंदगी में भूलते जा रहे थे— कभी-कभी सबसे बड़ा इलाज किसी अपने के पास होने में, और उसके स्पर्श में छिपा होता है।




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