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New Delhi, November 5, 2026: वर्किंग महिलाओं में देर से मां बनने का ट्रेंड, आखिर क्यों 35 के बाद बढ़ जाती है हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी, इन जोखिमों से रहें सावधान.
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The source note says: 7 Min Read चंडीगढ़: करियर, आर्थिक स्थिरता और बदलती जीवनशैली के बीच अब महिलाएं मातृत्व की योजना पहले की तुलना में देर से बना रही हैं. 35 या 40 साल की उम्र के बाद मां बनना अब असामान्य नहीं है. हालांकि, बढ़ती उम्र के साथ गर्भधारण में कुछ चुनौतियां और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी बढ़ सकते हैं. ऐसे में सही समय पर जांच, विशेषज्ञ की सलाह और नियमित देखभाल गर्भावस्था को सुरक्षित बनाने में अहम भूमिका निभाती है.
The source note says: करियर के कारण देर से मां बनने का ट्रेंड: इस बारे में अधिक जानकारी के लिए ईटीवी भारत ने चंडीगढ़ के कोकून हॉस्पिटल की सीनियर कंसल्टेंट ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी डॉ. श्रुति कैथ से बातचीत की. बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि, "आजकल महिलाएं पढ़ाई, करियर और आर्थिक आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता देते हुए मातृत्व की योजना आगे बढ़ा रही हैं. शादी में देरी, निजी परिस्थितियां और पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याएं भी इसके कारण हो सकती हैं. चंडीगढ़ में मोटापे और जीवनशैली से जुड़ी समस्याओं के बीच कई महिलाएं गर्भधारण से पहले विशेषज्ञ सलाह लेना जरूरी समझती हैं. वह कामकाजी महिलाओं की जटिल गर्भावस्थाओं की देखभाल भी करती हैं."
The source note says: 35 के बाद प्रजनन क्षमता में आती है गिरावट: डॉ. श्रुति कैथ ने बताया कि, "बढ़ती उम्र के साथ महिलाओं की प्रजनन क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है. 35 से 40 साल के बाद यह गिरावट अधिक तेजी से हो सकती है. इसकी प्रमुख वजह अंडाणुओं की संख्या और गुणवत्ता में बदलाव है. उम्र बढ़ने के साथ अंडाणुओं में क्रोमोसोम संबंधी गड़बड़ियों की आशंका भी बढ़ती है. इससे गर्भधारण में परेशानी, गर्भपात और बच्चे में कुछ आनुवंशिक स्थितियों का जोखिम बढ़ सकता है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि इस उम्र में गर्भावस्था सुरक्षित नहीं हो सकती. कई महिलाएं 35 से 40 साल के बाद भी स्वस्थ बच्चे को जन्म देती हैं. जोखिम महिला की उम्र, स्वास्थ्य और पहले से मौजूद बीमारियों पर निर्भर करता है."
The source note says: डायबिटीज से हाई ब्लड प्रेशर तक बढ़ सकती हैं ये परेशानियां : डॉ. कैथ ने आगे कहा कि, "35 से 40 साल के बाद गर्भावस्था में कुछ जटिलताओं की आशंका बढ़ सकती है. इनमें गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और प्री-एक्लेम्पसिया प्रमुख हैं. प्री-एक्लेम्पसिया में गर्भावस्था के दौरान ब्लड प्रेशर बढ़ने के साथ शरीर के दूसरे अंग भी प्रभावित हो सकते हैं. समय पर पहचान और इलाज न मिलने पर यह मां और बच्चे दोनों के लिए गंभीर स्थिति बन सकती है. इसके अलावा गर्भपात, समय से पहले प्रसव, बच्चे का कम वजन और सिजेरियन डिलीवरी की संभावना भी बढ़ सकती है. 40 साल के बाद कुछ जोखिम और अधिक बढ़ सकते हैं. मोटापा, थायरॉइड, डायबिटीज या पहले से हाई ब्लड प्रेशर होने पर अतिरिक्त निगरानी जरूरी हो जाती है."
The source note says: सिर्फ अच्छी डाइट से नहीं रुकते उम्र के जैविक बदलाव: डॉ. श्रुति ने बताया कि, "स्वस्थ जीवनशैली गर्भावस्था के लिए शरीर को तैयार करने में मदद करती है, लेकिन उम्र से जुड़े जैविक बदलाव अपनी जगह रहते हैं. संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और पर्याप्त नींद से महिला का संपूर्ण स्वास्थ्य बेहतर हो सकता है. वजन और पोषण की स्थिति को नियंत्रित रखना भी महत्वपूर्ण है. लेकिन केवल डाइट या व्यायाम के जरिए उम्र के साथ होने वाली प्रजनन क्षमता की गिरावट को पूरी तरह रोकना संभव नहीं है. इसलिए गर्भधारण की योजना बनाते समय उम्र और स्वास्थ्य दोनों को ध्यान में रखना चाहिए."
The source note says: गर्भधारण से पहले ये जांच कराना जरूरी: डॉ. कैथ ने बताया कि, "गर्भधारण की योजना बनाने से पहले स्त्री रोग विशेषज्ञ से मिलना चाहिए. प्री-कन्सेप्शन चेकअप में महिला की मेडिकल हिस्ट्री, पहले की गर्भावस्थाओं, मासिक धर्म, दवाओं और परिवार में आनुवंशिक बीमारी के इतिहास की जानकारी ली जाती है. जरूरत के अनुसार ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, थायरॉइड और हीमोग्लोबिन की जांच कराई जा सकती है. वजन और पोषण का आकलन भी जरूरी है. गर्भधारण से पहले फोलिक एसिड लेने की सलाह दी जाती है, जो बच्चे के

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