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महाकुंभ में भगदड़ पर शंकराचार्य का हमला, बोले- धमकियों से नहीं डरता संन्यासी
महाकुंभ में मौनी अमावस्या के दिन हुई भगदड़ को लेकर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने यूपी सरकार पर लगातार सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि प्रशासन वास्तविक आंकड़े छिपा रहा है और न ही भगदड़ की सटीक जानकारी दी जा रही है। शंकराचार्य ने अब दावा किया है कि उन्हें जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं, लेकिन इससे उन्हें कोई डर नहीं, क्योंकि वह पहले ही अपना श्राद्ध तर्पण कर चुके हैं।
'सच्चाई छिपाने में लगी है सरकार'
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि अगर सरकार को उनकी बातें गलत लगती हैं, तो उन्हें तथ्य प्रस्तुत करने चाहिए। उन्होंने कहा, "अगर मैं गलत बोल रहा हूं, तो सरकार संवाद करे और सच्चाई बताए। लेकिन वे ऐसा नहीं करते, बस धमकियां देते हैं। अभी कुछ लोगों ने फेसबुक पर लिखा कि मुझे जान से मार देंगे। संन्यासी को मरने का डर नहीं होता, हमने सांसारिक सुख भोगने के लिए जीवन नहीं चुना है।"
'लाशों को दबाने की बातें सुनी जा रही हैं'
उन्होंने आगे कहा कि प्रशासन स्थिति को छिपाने में लगा है, जबकि सच्चाई यह है कि शवों को खेतों में दफनाने और मार्च्यूरी में सड़ने की खबरें आ रही हैं। "अगर आप कहते हैं कि केवल 30 लोग मरे, तो फिर सफेद कपड़ों में लिपटी लाशों पर 57, 67 नंबर कैसे लिखे दिख रहे हैं? यह नंबरिंग क्यों की गई? कुछ पत्रकारों ने छिपकर तस्वीरें खींचीं, जिससे हकीकत सामने आ गई," शंकराचार्य ने कहा।
'डर से छवि बचाने में लगी है सरकार'
शंकराचार्य ने सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि घटना के सही आंकड़े छिपाकर केवल अपनी छवि बचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा, "अगर इतने लोग मरे हैं, तो सच बताइए। इससे ज्यादा अच्छा होता। छिपाने से लगता है कि सरकार डरी हुई है। अगर आप सख्त नेता हैं, तो सामने आइए और स्थिति संभालिए।"
'संन्यासी को मौत का डर नहीं'
शंकराचार्य ने साफ कहा कि धमकियों से वह डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा, "मरने की धमकी उन्हें दो जो जीवन से डरते हैं। हम तो हिंदू धर्म के मानने वाले हैं, हमें सांसारिक सुखों से कोई लगाव नहीं है।"
निष्कर्ष
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के इन बयानों ने महाकुंभ में हुई भगदड़ और सरकार की तैयारियों को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। प्रशासन की ओर से अभी तक इस पर कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन यह मुद्दा तूल पकड़ता जा रहा है।




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