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कांग्रेस नेता और विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने छात्रों के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों का समर्थन करते हुए आंदोलन की तीन मुख्य मांगें सार्वजनिक रूप से रखी हैं। बार-बार परीक्षा पेपर लीक होने और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई पर देशव्यापी आक्रोश को देखते हुए, गांधी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की मांग की।
अन्य मांगों में हालिया मार्च के दौरान हुई हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने के लिए गहन जांच और चरमराते शिक्षा तंत्र पर संसद में व्यापक बहस शामिल है। गांधी ने जोर देकर कहा कि छात्रों का गुस्सा जायज है और उन्होंने सिस्टम को "खोखला" करार देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से युवाओं से माफी मांगने का आग्रह किया।
उनके ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन जारी है और इसमें विपक्षी नेताओं व सार्वजनिक हस्तियों की भागीदारी बढ़ रही है। मानसून सत्र के दौरान गांधी के हस्तक्षेप ने सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है, क्योंकि छात्र व्यवस्थागत सुधार, पीड़ितों के लिए मुआवजे और झड़पों में घायल हुए लोगों के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं। यह घटनाक्रम भारत में शिक्षा और युवाओं की आकांक्षाओं को लेकर बढ़ते राजनीतिक मतभेद को उजागर करता है।




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