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सोनिया गांधी ने इमरजेंसी, संजय गांधी और बाबरी मस्जिद पर क्या कहा?

नई दिल्ली, November 7, 2026: सोनिया गांधी ने इमरजेंसी, संजय गांधी और बाबरी मस्जिद पर क्या कहा?। साइन इन BBC News, हिंदी सामग्री को स्किप करें होम पेज देखिए सुनिए मेरी ख़बरें सेक्शन होम पेज भारत विदेश…

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Image Credit: Instafeed Desk
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By Pandey Gaurav | Mumbai, Maharashtra | खबरें - 07 November 2026

नई दिल्ली, November 7, 2026: सोनिया गांधी ने इमरजेंसी, संजय गांधी और बाबरी मस्जिद पर क्या कहा?।

साइन इन BBC News, हिंदी सामग्री को स्किप करें होम पेज देखिए सुनिए मेरी ख़बरें सेक्शन होम पेज भारत विदेश हेल्थ मनोरंजन करियर फ़ाइनेंस खेल विज्ञान-टेक्नॉलॉजी भारत विदेश हेल्थ मनोरंजन करियर फ़ाइनेंस खेल विज्ञान-टेक्नॉलॉजी सोनिया गांधी ने इमरजेंसी, संजय गांधी और बाबरी मस्जिद पर क्या कहा? इमेज स्रोत, Chandradeep Kumar/ The India Today Group via Getty Images

लोड हो रहा है लोड हो रहा है कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने 1975 में देश में लगी इमरजेंसी, इंदिरा और राजीव गांधी की हत्या और बाबरी मस्जिद गिराए जाने की घटना को लेकर अपनी बात रखी है.

उन्होंने आपातकाल के फ़ैसले में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और उनके बेटे संजय गांधी की भूमिका पर भी चर्चा की.

सोनिया गांधी के मुताबिक़, इमरजेंसी लगाने के लिए केवल संजय गांधी ज़िम्मेदार नहीं थे, बल्कि इंदिरा गांधी पर उनके कुछ वरिष्ठ सहयोगियों का भी दबाव था.

अंग्रेज़ी अख़बार ' द हिंदू ' और ' द गार्डियन ' को दिए इंटरव्यू में सोनिया गांधी ने ये बातें अपनी किताब 'बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ़ लव' के लॉन्च से पहले कहीं.

इस दौरान उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के इमरजेंसी को लेकर विरोध और परिवार के भीतर इस मुद्दे पर पैदा हुए तनाव का भी ज़िक्र किया.

इमरजेंसी के दौरान संजय गांधी की भूमिका के सवाल पर सोनिया गांधी ने कहा कि इसके लिए केवल संजय गांधी ज़िम्मेदार नहीं थे.

उन्होंने कहा, "सिर्फ़ संजय गांधी ही इसके लिए ज़िम्मेदार नहीं थे, हालांकि आम लोगों की नज़र में उनका नाम अक्सर आपातकाल से जुड़ जाता है. इंदिरा गांधी पर उनके कुछ वरिष्ठ साथियों का भी काफ़ी दबाव था. मुझे लगता है कि उनके आसपास राजीव जैसे बहुत कम लोग थे, जिनकी सोच उनसे अलग थी. मेरा मानना है कि आख़िरकार मेरी सास ने अपनी समझ से हालात को पहचान लिया था और उन्हें सुधारने के लिए क़दम उठाए थे."

सोनिया गांधी के मुताबिक़, ''आपातकाल लगाने के फ़ैसले को लेकर परिवार के लोग भी एकमत नहीं थे. राजीव गांधी इसके ख़िलाफ़ थे. उन्होंने अपनी मां से अगला चुनाव आने तक इंतज़ार करने को कहा था. लेकिन उनके छोटे भाई संजय गांधी इमरजेंसी के फ़ैसले के पक्ष में थे. परिवार के साथ एक रात के खाने के दौरान उन्होंने कहा था कि विपक्ष उनकी मां को बर्बाद कर देगा.''

द गार्डियन के मुताबिक़, सोनिया गांधी अपनी किताब में लिखती हैं, "अगर संजय को काबू में रखा जाता, तो बाद में हुए नुक़सान का बड़ा हिस्सा रोका जा सकता था."

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सोनिया गांधी याद करती हैं कि इस वजह से उनके परिवार के अंदर भी तनाव बढ़ गया था.

उनके मुताबिक़, राजीव गांधी ने अपनी मां से इस बारे में बात करने की कोशिश की, लेकिन इंदिरा ने उनकी बात नहीं सुनी.

सोनिया गांधी कहती हैं, "आपातकाल के दौरान जो कुछ हो रहा था, उसकी असली गंभीरता मुझे उसके ख़त्म होने के बाद ही समझ आई. हां, लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर रोक लगाई गई थी और बिना मुक़दमे के हिरासत में रखने के ख़िलाफ़ मिलने वाला क़ानूनी अधिकार भी ख़त्म कर दिया गया था. लेकिन यह सब संविधान के तहत किया गया था."

स्रोत: Instafeed Desk।

तस्वीर: Uprising Man, Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

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